पायलट की जानबूझकर की गई हरकत से विमान सुरक्षा पर नया खतरा, 20 साल में 800 से ज्यादा मौतें

हवाई सफर पहले के मुकाबले काफी सुरक्षित हुआ है, लेकिन एविएशन इंडस्ट्री के सामने अब एक अलग तरह का खतरा चर्चा में है। यह खतरा विमान के अंदर ही मौजूद हो सकता है—यानी अगर कोई पायलट जानबूझकर विमान को नुकसान पहुंचाने या उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करे। हालिया फ्लाईदुबई घटना ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई से विमान और उसमें सवार सैकड़ों यात्रियों को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2005 से 2025 के बीच कमर्शियल एविएशन में 270 घातक हादसे हुए, जिनमें विमान में सवार 8,470 लोगों की मौत हुई। अन्य मौतों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 8,778 तक पहुंचता है।
वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में कम से कम 800 मौतें ऐसे विमान हादसों में हुईं, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई से जुड़ा माना या जिनमें ऐसी कार्रवाई की पुष्टि हुई।
हर मामले में स्थानीय जांच का निष्कर्ष अलग
हालांकि, हर मामले में स्थानीय जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अमेरिकी अधिकारियों की राय से मेल नहीं खाते। कुछ हादसों की अंतिम जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
इनमें 2014 का मलेशिया एयरलाइंस MH370 हादसा, 2022 का चाइना ईस्टर्न विमान हादसा और 2025 का एयर इंडिया हादसा शामिल हैं। इन मामलों में अमेरिकी अधिकारियों ने जानबूझकर की गई कार्रवाई की आशंका जताई है, लेकिन संबंधित स्थानीय जांच में अभी तक ऐसा अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जर्मनविंग्स हादसा था आधिकारिक तौर पर जानबूझकर किया गया क्रैश
2015 का जर्मनविंग्स हादसा ऐसा मामला है, जिसे आधिकारिक जांच में जानबूझकर किया गया क्रैश माना गया। जांच के अनुसार, को-पायलट ने विमान को फ्रेंच आल्प्स में जानबूझकर गिरा दिया था। इस हादसे में विमान में सवार सभी 150 लोगों की मौत हो गई थी।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में दुनियाभर में हवाई यात्रा में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि 2005 से 2025 के बीच कमर्शियल एविएशन में मौतों की संख्या करीब 35 प्रतिशत कम हुई। यानी सामान्य विमान हादसों में कमी आई है, लेकिन जानबूझकर की गई कार्रवाई से जुड़े हादसों का खतरा अब सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अलग चुनौती बनकर सामने आ रहा है।
पायलट की स्क्रीनिंग से लेकर कॉकपिट सुरक्षा तक पर फोकस
इसी वजह से एयरलाइंस, रेगुलेटर्स और विमान निर्माता अब केवल तकनीकी खराबी या पायलट की सामान्य गलती पर ही ध्यान नहीं दे रहे हैं। पायलटों की स्क्रीनिंग, कॉकपिट सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और ऐसी तकनीकों पर भी चर्चा हो रही है, जो जरूरत पड़ने पर पायलट की जानबूझकर की गई खतरनाक कार्रवाई को रोकने में मदद कर सकें।
हालिया फ्लाईदुबई घटना ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। विमान सुरक्षा में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मशीन में खराबी या मानवीय गलती को कैसे रोका जाए, बल्कि यह भी है कि अगर कॉकपिट के अंदर मौजूद व्यक्ति ही जानबूझकर विमान को खतरे में डालने की कोशिश करे, तो उसे कैसे रोका जाए।



