छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याताओं के लिए लागू होगा नया ‘डेली वेज’ फॉर्मूला!

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में सालों से चली आ रही एक बड़ी विसंगति और ‘पीरियड पॉलिटिक्स’ पर आखिरकार उच्च शिक्षा विभाग का हथौड़ा चल गया है। राज्य के 343 शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे अतिथि व्याख्याताओं (गेस्ट फैकल्टी) के लिए एक बेहद राहत भरी और क्रांतिकारी खबर है। अब इन शिक्षकों को कॉलेज के चक्कर काटने और घड़ी देखकर पीरियड गिनने की मजबूरी से आज़ादी मिलने वाली है।
सरकार ने पुरानी ‘प्रति पीरियड’ (Per Period) भुगतान प्रणाली को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर ली है। इसकी जगह अब एक नया और पारदर्शी ‘प्रतिदिन’ (Per Day) मानदेय सिस्टम लागू होने जा रहा है। यानी, अब बात सिर्फ पीरियड्स की नहीं, बल्कि कॉलेज में शिक्षक की रोज़ाना की उपस्थिति और उनके पूरे दिन के योगदान की होगी।
ख़त्म होगी ‘पीरियड पॉलिटिक्स’ और कम पैसे देने का खेल
दरअसल, अब तक की व्यवस्था में एक ऐसी लूपहोल (खामी) थी, जिसका नुकसान सीधे तौर पर अतिथि व्याख्याताओं को उठाना पड़ता था। पुराने नियम के मुताबिक, 40 से 45 मिनट के एक पीरियड के लिए ₹400 और 60 मिनट के एक पूरे घंटे के पीरियड के लिए ₹500 का भुगतान किया जाता था। एक दिन में अधिकतम 4 पीरियड का ही पैसा मिल सकता था।
सुनने में तो यह ठीक लगता था, लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और थी। अतिथि व्याख्याताओं की एक लंबे समय से शिकायत थी कि कई कॉलेजों में उनके साथ ‘पीरियड पॉलिटिक्स’ होती थी। अंदरूनी खींचतान या मिलीभगत के चलते उन्हें जानबूझकर कम पीरियड अलॉट किए जाते थे। नतीजा यह होता था कि कॉलेज में पूरा समय देने के बावजूद महीने के आखिर में उनकी जेब खाली रह जाती थी। मानदेय में इस अस्थिरता के कारण वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और लगातार एक निश्चित दैनिक व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
शिक्षकों के इसी आक्रोश और मांग को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने एक समीक्षा समिति का गठन किया था। समिति ने गहराई से इस दर्द को समझा और सीधे तौर पर ‘नो पीरियड, ओनली डेली अटेंडेंस’ की पुरज़ोर सिफारिश कर डाली, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
अब रोज़ाना मिलेंगे ₹2,000,
इस नए सिस्टम के लागू होते ही भुगतान का पूरा गणित बदल जाएगा। अब अगर कोई अतिथि व्याख्याता कॉलेज आता है और अपनी सेवा देता है, तो उसे पीरियड्स की संख्या गिने बिना सीधे ₹2,000 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था में क्या था? यदि ₹400 प्रति पीरियड का खेल चलता था, तो अधिकतम ₹1600 रोज़ (यानी करीब ₹41,600 महीना) ही बन पाता था। वहीं ₹500 वाले स्लैब में अधिकतम ₹2,000 रोज़ (₹50,000 महीना) की सीमा थी, लेकिन यह अधिकतम सीमा तब मिलती थी जब पूरे चार पीरियड मिलते थे, जो अमूमन नहीं हो पाता था।
नई व्यवस्था में क्या होगा?
अब कॉलेज प्रबंधन किसी शिक्षक के पीरियड कम करके उसका पैसा नहीं काट सकेगा। उपस्थिति दर्ज होते ही ₹2,000 प्रतिदिन का हकदार वह शिक्षक हो जाएगा। हालांकि, महीने में अधिकतम मानदेय की सीमा ₹50,000 तय की गई है, जो कि एक सम्मानजनक राशि है।
जल्द आएगा आदेश
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि समिति की रिपोर्ट विभाग को मिल चुकी है और इस पर अंतिम मुहर लग चुकी है। बहुत जल्द ही इसका आधिकारिक शासनादेश (Order) जारी कर दिया जाएगा।
इस फैसले का सीधा असर छत्तीसगढ़ के 343 सरकारी कॉलेजों और विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे करीब 1,000 से अधिक अतिथि व्याख्याताओं पर पड़ेगा। इसके साथ ही, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति प्रक्रिया के नए दिशा-निर्देश भी जल्द ही जारी होने वाले हैं, जिसके बाद कॉलेज अपने स्तर पर भर्ती और नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर देंगे।
नियुक्ति और रिन्यूअल के नियमों में कोई बदलाव नहीं
भले ही पैसों के भुगतान का तरीका बदल रहा हो, लेकिन सेवा शर्तों और नियुक्ति के मूल नियम पहले जैसे ही रहेंगे। इन शिक्षकों की सेवाएं हर साल की तरह 11 महीने के कार्यकाल के लिए ही ली जाएंगी।
जिन व्याख्याताओं के पास Ph.D, NET या M.Phil जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं हैं, उनके कार्यकाल का सीधे नवीनीकरण (Renewal) कर दिया जाएगा।
वहीं, जो शिक्षक केवल पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की डिग्री के भरोसे सेवाएं दे रहे हैं, उनके पदों के लिए कॉलेज दोबारा से विज्ञापन जारी करेगा। इस खुली प्रक्रिया में पुराने अनुभवी चेहरों के साथ-साथ नए प्रतिभावान अभ्यर्थियों को भी किस्मत आजमाने का मौका मिलेगा।
सम्मानजनक रोज़गार की ओर एक बड़ा कदम
सरकार का यह कदम न केवल अतिथि व्याख्याताओं को आर्थिक सुरक्षा देगा, बल्कि कॉलेजों के भीतर होने वाली गुटबाजी और पीरियड बांटने के नाम पर होने वाले पक्षपात को भी पूरी तरह से ख़त्म कर देगा। जब शिक्षकों का दिमाग ‘पीरियड गिनने’ और ‘कम पैसे मिलने’ की चिंता से मुक्त होगा, तो वे अपना पूरा ध्यान छात्रों के भविष्य को संवारने में लगा सकेंगे। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए यह बदलाव यकीनन एक नए सवेरे जैसा है।

