सुप्रीम कोर्ट की छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पर कड़ी टिप्पणी, कहा- जजों को IPC की धारा 304 के प्रावधानों की जानकारी तक नहीं

रायपुर। हत्या के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जजों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के पार्ट I और पार्ट II के बीच का अंतर तक पता नहीं है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को दयनीय बताते हुए याचिकाकर्ता और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जरा हाईकोर्ट की दयनीय हालत तो देखिए। जजों को यह तक नहीं पता कि IPC की धारा 304 पार्ट I और 304 पार्ट II क्या है और आप उम्मीद करते हैं कि जज सबूतों को समझेंगे?”
हत्या के मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
दरअसल, याचिकाकर्ता के खिलाफ सरायपाली की अतिरिक्त सत्र अदालत में IPC की धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा चलाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि को IPC की धारा 302 से बदलकर धारा 304 पार्ट II के तहत गैर-इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले में चोटों की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियार और घटना की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर उचित ध्यान नहीं दिया। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में कानूनी प्रावधानों और साक्ष्यों के मूल्यांकन को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- हाईकोर्ट का आदेश क्यों न रद्द किया जाए?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुसार, हाईकोर्ट रिकॉर्ड पर मौजूद मौखिक गवाही को समझने में नाकाम रहा। इस पर शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर कारण बताने को कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को क्यों न रद्द किया जाए और हत्या के लिए दोषी ठहराने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को क्यों न बहाल किया जाए।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से भी स्पष्टीकरण मांगा है। अब आगे की सुनवाई में हाईकोर्ट के फैसले और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण रहेगा।



