ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों पर कसेगा शिकंजा, गोदामों से लेकर पैकेट की लेबलिंग तक होगी जांच

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों पर होगी सख्ती
आज के समय में मोबाइल पर कुछ क्लिक करके घर बैठे खाना, मिठाई, नमकीन और पैक्ड खाद्य सामग्री मंगाना आम हो गया है। त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन खरीदारी और फूड डिलीवरी की मांग और बढ़ जाती है। लेकिन ऑनलाइन ऑर्डर किए गए खाद्य पदार्थ कितने सुरक्षित हैं और उनकी गुणवत्ता से जुड़े दावे कितने सही हैं, यह उपभोक्ता के लिए आसानी से जांचना संभव नहीं होता।
इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े गोदामों की जांच की तैयारी की है। प्रस्तावित अभियान के दौरान यह देखा जाएगा कि कंपनियां खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं। खाद्य सामग्री के भंडारण से लेकर पैकिंग और डिलीवरी तक अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की भी पड़ताल की जाएगी।
बासी खाना, पैकेट में कीड़े और गलत ऑर्डर जैसी शिकायतें होंगी जांच का आधार
ऑनलाइन खाद्य सामग्री की बिक्री और डिलीवरी को लेकर समय-समय पर गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें बासी भोजन मिलना, पैकेट में कीड़े निकलना और ग्राहक को गलत सामान पहुंचना जैसी समस्याएं शामिल हैं।
जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि खाद्य सामग्री को गोदामों में किस तरह रखा जाता है और उसे सुरक्षित रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं या नहीं। इसके अलावा, परिवहन और डिलीवरी के दौरान खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाने के लिए निर्धारित सावधानियां बरती जा रही हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी उमेश कुमार के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम से बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में भी सख्ती बरतने की तैयारी है। इसके तहत गोदामों की सघन जांच की जाएगी।
पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट और लाइसेंस की होगी जांच
खाद्य पदार्थों की जांच केवल उनकी गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगी। पैकेट पर दी गई जानकारी और लेबलिंग भी जांच के दायरे में आएगी। अधिकारियों की ओर से यह देखा जाएगा कि उत्पाद पर निर्माण या पैकिंग की तारीख, उपयोग की अंतिम तिथि और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस से संबंधित जरूरी जानकारी दर्ज है या नहीं।
खाद्य उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत शुद्ध’, ‘प्राकृतिक’, ‘ताजा’, ‘हेल्दी’ और ‘हार्ट के लिए हेल्दी’ जैसे दावे किए जाते हैं। कुछ उत्पादों को मल्टीग्रेन या विशेष पोषण गुणों वाला बताकर भी बेचा जाता है। ऐसे दावों की सत्यता महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपभोक्ता इन्हीं जानकारियों के आधार पर खरीदारी का फैसला लेते हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के विज्ञापन और दावों से संबंधित नियमों के अनुसार, खाद्य पदार्थों के बारे में किए जाने वाले दावे सत्य, स्पष्ट और गैर-भ्रामक होने चाहिए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली उत्पाद संबंधी जानकारी भी वास्तविक पैकेट के लेबल से मेल खानी चाहिए। इसलिए जांच में यह देखा जाएगा कि उपभोक्ताओं को दी जा रही जानकारी सही है या नहीं।
गोदामों में खाद्य सामग्री के रखरखाव पर भी नजर
खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए उचित तापमान, स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था जरूरी होती है। यदि खाद्य सामग्री को गलत परिस्थितियों में रखा जाए, तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से ऑनलाइन कारोबार से जुड़े गोदामों में खाद्य पदार्थों को रखने की व्यवस्था भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन, पैक्ड खाद्य पदार्थ और तैयार भोजन की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ग्राहकों तक पहुंचने वाला सामान सुरक्षित हो और उसकी पैकिंग या परिवहन के दौरान लापरवाही न बरती जाए।
FSSAI की 3 दिसंबर 2024 की एडवाइजरी में ऑनलाइन खाद्य कारोबारियों के लिए डिलीवरी के समय उत्पाद की शेष शेल्फ लाइफ को लेकर प्रावधान बताया गया है। इसके अनुसार, उत्पाद की शेष शेल्फ लाइफ कम से कम 30 प्रतिशत या एक्सपायरी तक 45 दिन होनी चाहिए—इनमें से जो भी अवधि कम हो। उपभोक्ताओं को भी खाद्य सामग्री खरीदते समय तारीख और पैकेट पर दी गई जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
बच्चों को आकर्षित करने वाली गैर-खाद्य वस्तुओं से भी सावधानी
खाद्य सामग्री के साथ खिलौने, छोटे प्लास्टिक के पात्र, सिक्के जैसी गैर-खाद्य वस्तुएं रखे जाने पर भी सावधानी जरूरी है। यदि ऐसी वस्तुएं इस तरह पैक की गई हों कि बच्चा उन्हें खाने योग्य समझ ले, तो उन्हें निगलने या गले में फंसने का खतरा हो सकता है।
इसलिए माता-पिता को बच्चों के लिए मंगाए गए खाद्य उत्पादों के पैकेट खोलते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। पैकेट के अंदर मौजूद वस्तुओं की जांच करें और छोटे हिस्सों या गैर-खाद्य सामग्री को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
ऑनलाइन खाद्य सामग्री खरीदते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान
- FSSAI लाइसेंस नंबर जांचें: खाद्य पदार्थ के पैकेट पर FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर देखें। लाइसेंस नंबर सामान्यतः 14 अंकों का होता है।
- एक्सपायरी डेट ध्यान से पढ़ें: ‘बेस्ट बिफोर’ और ‘एक्सपायरी’ या ‘यूज-बाय’ का अर्थ एक जैसा नहीं है। उत्पाद पर दी गई तारीख और निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
- पैकेट की सील जांचें: पैकेट खुला हो, सील टूटी हो या पैकिंग क्षतिग्रस्त दिखाई दे, तो खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।
- केवल हेल्दी दावों पर भरोसा न करें: ‘प्राकृतिक’, ‘शुद्ध’, ‘ताजा’ या ‘हेल्दी’ जैसे शब्द देखकर ही उत्पाद को सुरक्षित न मानें। सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और लेबल पढ़ें।
- खराब सामान मिलने पर शिकायत करें: खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी, गुणवत्ता संबंधी समस्या या भ्रामक जानकारी मिलने पर संबंधित प्लेटफॉर्म और खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करें। उपलब्ध शिकायत माध्यमों में FSSAI का टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता हेल्पलाइन का भी उपयोग किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है निगरानी
ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स ने खरीदारी को आसान बनाया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के मामले में लापरवाही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। ऐसे में कंपनियों के कामकाज, गोदामों की स्थिति, पैकिंग और उत्पादों पर किए जाने वाले दावों की जांच अहम है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की प्रस्तावित कार्रवाई का उद्देश्य ऑनलाइन माध्यम से बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और नियमों के पालन की पड़ताल करना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच अभियान के दौरान किन कमियों का पता चलता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।



