NHM कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का नहीं हुआ पालन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में जिला प्रशिक्षण समन्वयक/एचआर (DTC) के पद पर कार्यरत दिलीप कुमार मधुकर की सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने माना कि विभाग ने कार्रवाई के दौरान मानव संसाधन नीति और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का समुचित पालन नहीं किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने दलील दी कि विभाग ने अपनी ही मानव संसाधन नीति के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी। उन्होंने अदालत को बताया कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि कर्मचारी के विरुद्ध सेवा समाप्ति का फैसला पूर्ण और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए बिना लिया गया। न्यायालय ने कहा कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर उसका जवाब प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभागीय नीति के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया का पालन भी किया जाना चाहिए।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी के खिलाफ कदाचार के आरोपों के आधार पर सेवा समाप्ति जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाती है और उससे उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तब पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होना आवश्यक है। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पारित आदेश न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं सकता।
इन तथ्यों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) के आदेश को निरस्त कर दिया।

