छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक, दिव्यांग आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला राज्य शासन की ओर से शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शर्तों और आरक्षण रोस्टर से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने इन प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने परीक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया।
पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को आरक्षण से बाहर रखने का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में त्रुटि हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग और समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा गया कि पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की उचित व्यवस्था नहीं की गई है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस वजह से पूर्णतः दृष्टिबाधित अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा में शामिल होने और सहायक शिक्षक पद के लिए अवसर पाने से वंचित हो रहे हैं। इसे उन्होंने संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
आरक्षण व्यवस्था में भेदभाव का दावा
भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पद आरक्षित किए गए थे। याचिका में कहा गया कि अंध-मूक-बधिर और अन्य दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को आरक्षित पदों का लाभ देने का प्रावधान है, लेकिन पूर्णतः दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था को लेकर आगे की स्थिति सरकार के जवाब तथा अदालत की आगामी सुनवाई पर निर्भर करेगी।



