मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को किन सबूतों के आधार पर मिली फांसी की सजा?

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चश्मदीद की गवाही, हत्या में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट और होटल के सीसीटीवी फुटेज समेत कई अहम सबूत पेश किए। करीब 13 महीने तक चले ट्रायल में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 126 सुनवाई हुईं।
चाकू और उस्तरे की बरामदगी बनी अहम कड़ी
जांच के अनुसार, 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। आरोप है कि हत्या के बाद उसके शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से ढक दिया गया, ताकि शव को छिपाया जा सके।
पुलिस ने मुस्कान और साहिल की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू और उस्तरा बरामद किया। घटनास्थल से मानव रक्त मिलने की बात भी जांच में सामने आई। इसके अलावा, एक चश्मदीद ने साहिल को हत्या वाली रात सौरभ के घर जाते देखने की बात कही। सौरभ के दोस्त संजीव पाल की गवाही को भी मामले में महत्वपूर्ण माना गया।
कॉल डिटेल और सोशल मीडिया चैट की जांच
अभियोजन पक्ष ने मुस्कान और साहिल की कॉल डिटेल तथा सोशल मीडिया पर हुई बातचीत को भी अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया। जांच में सौरभ की मां रेनू और उसके दोस्त संजीव पाल के फोन रिकॉर्ड भी शामिल किए गए। इन डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए दोनों आरोपियों के बीच संपर्क और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल की गई।
जांच एजेंसियों ने हत्या के बाद मुस्कान और साहिल की शिमला-मनाली यात्रा से जुड़े होटल रिकॉर्ड भी जुटाए। जिन होटलों में दोनों के ठहरने की बात सामने आई, वहां के सीसीटीवी फुटेज और होटल प्रबंधकों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों के आधार पर हत्या के बाद की गतिविधियों और घटना को छिपाने की कोशिशों से जुड़ी कड़ियां अदालत के सामने रखीं।
18 मार्च को हुआ था हत्याकांड का खुलासा
सौरभ का छोटा भाई राहुल 18 मार्च 2025 को घर पहुंचा तो वहां से दुर्गंध आ रही थी। सौरभ के बारे में संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने के बाद मामला सामने आया। पुलिस ने जांच के दौरान नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए।
अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयानों, भौतिक साक्ष्यों और डिजिटल रिकॉर्ड सहित मामले से जुड़े विभिन्न सबूतों पर विचार किया गया।



