CM Helpline पर फूटा D.Ed.अभ्यर्थियों का गुस्सा
मंत्री के खिलाफ ही दर्ज करा दी शिकायत

CM Helpline रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवाओं के रोजगार और सरकारी दावों के बीच की खाई कितनी गहरी हो चुकी है, इसकी बानगी राजधानी रायपुर में साफ देखी जा सकती है। सहायक शिक्षक भर्ती 2023 (Assistant Teacher Recruitment 2023) की चयन सूची में नाम आने के बाद भी नियुक्ति आदेश के लिए भटक रहे डी.एड. (D.Ed.) अभ्यर्थियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले 170 दिनों से, यानी लगभग छह महीनों से, खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे इन अभ्यर्थियों ने अब अपनी लड़ाई को सीधे सत्ता के गलियारे तक पहुंचा दिया है। इसी कड़ी में CM Helpline पर फूटा D.Ed. अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
दरअसल, इंटरनेट पर इस समय एक ऑडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस कथित ऑडियो में एक पीड़ित डी.एड. अभ्यर्थी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के प्रतिनिधि को अपनी आपबीती सुना रहा है। ऑडियो में अभ्यर्थी का आक्रोश और बेबसी साफ झलक रही है। उसका कहना है कि जब विभाग के चक्कर काटकर और मंत्रियों के आश्वासन सुनकर कुछ नहीं बदला, तो मजबूरन उन्हें सीधे मुख्यमंत्री की चौखट पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दस्तक देनी पड़ी। इस एक फोन कॉल ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश के युवा अब केवल कागजी वादों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
(उज्ज्वल भूमि इस वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता। )
CM Helpline : 170 दिनों का ‘मौन सत्याग्रह’ और सिस्टम की बेरुखी
इस पूरी खबर का सबसे दुखद पहलू यह है कि ये युवा कोई नई नौकरी नहीं मांग रहे हैं। इन्होंने राज्य सरकार द्वारा आयोजित कठिन परीक्षा को पास किया, मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया भी पूरी कर ली। इसके बावजूद पिछले 170 दिनों से ये युवा राजधानी के धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
इस लंबे समय के दौरान छत्तीसगढ़ ने कई मौसम बदले, लेकिन इन भावी शिक्षकों की किस्मत नहीं बदली। अनशन स्थल पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने दिनों में उनके कई साथी बीमार पड़े, कई आर्थिक तंगी के कारण मानसिक तनाव का शिकार हो चुके हैं, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।
CM Helpline : शिक्षा मंत्री के आश्वासनों से मोहभंग
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से कई बार मुलाकात की। हर मुलाकात में उन्हें जल्द से जल्द स्कूल आबंटन और नियुक्ति पत्र जारी करने का भरोसा दिया गया। लेकिन हफ्तों और महीनों बीत जाने के बाद भी जब फाइलें आगे नहीं बढ़ीं, तो अभ्यर्थियों को लगा कि उनके साथ केवल ‘समय काटने’ की राजनीति हो रही है। यही कारण है कि अब अभ्यर्थियों ने मंत्रियों के बंगलों के चक्कर काटने के बजाय सीधे CM Helpline का रुख किया है, ताकि उनकी बात बिना किसी फिल्टर के सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच सके।
आखिर कहां फंसा है पेंच?
सूत्रों की मानें तो इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में कुछ तकनीकी और कानूनी पेच फंसे हुए हैं, जिसके चलते विभाग फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। लेकिन अभ्यर्थियों का तर्क बिल्कुल सीधा और जायज है। उनका कहना है कि यदि कोई विसंगति या तकनीकी समस्या थी, तो उसे छह महीनों के भीतर सुलझा लिया जाना चाहिए था। किसी भी विसंगति की सजा उन योग्य युवाओं को क्यों मिलनी चाहिए जिन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल इस परीक्षा की तैयारी में झोंक दिए?
इस समय प्रदेश के सैकड़ों सरकारी स्कूल ऐसे हैं जो शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। एकल शिक्षकीय (Single Teacher) स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह स्थिति और भी हैरान करने वाली है कि एक तरफ बच्चे पढ़ने के लिए शिक्षकों का इंतजार कर रहे हैं, और दूसरी तरफ योग्य शिक्षक सड़क पर बैठकर नियुक्ति की भीख मांग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा युवाओं का दर्द
CM Helpline पर दर्ज कराई गई इस शिकायत और उसके बाद वायरल हुए ऑडियो ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक्स (ट्विटर) और फेसबुक पर युवा लगातार हैशटैग चलाकर सरकार को घेर रहे हैं। बेरोजगार संगठनों का कहना है कि यह केवल कुछ अभ्यर्थियों का गुस्सा नहीं है, बल्कि प्रदेश के उन लाखों शिक्षित बेरोजगारों का आक्रोश है जो हर दिन वैकेंसी और ज्वाइनिंग के नाम पर प्रशासनिक लेटलतीफी का शिकार होते हैं।
युवाओं ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद अब अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि यह उनके सब्र की आखिरी सीमा थी। यदि इस कदम के बाद भी शासन स्तर पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तो वे अपने इस शांतिपूर्ण अनशन को एक उग्र आंदोलन में बदलने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर न तो स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से और न ही शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के कार्यालय से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। लेकिन इस वायरल ऑडियो और CM Helpline पर फूटे इस गुस्से ने सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती जरूर खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि शासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी संवेदनशीलता दिखाता है।

