
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाने वाली है। राज्य सरकार ने विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बीच हुई चर्चा के बाद सत्र की तिथियों और अवधि पर सहमति बनी, जिसके पश्चात राज्यपाल की मंजूरी भी प्राप्त हो गई। विधानसभा सचिवालय द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
पांच दिनों तक चलेगी सदन की कार्यवाही
मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान सरकार विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सदन में जवाब देगी, वहीं विपक्ष को भी सरकार से तीखे सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को उठाने का अवसर मिलेगा। सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
जनहित के कई अहम मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
हालांकि मानसून सत्र की अवधि केवल पांच दिनों की है, लेकिन इसे राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था की स्थिति, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे, विकास कार्यों की प्रगति, बारिश और संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां जैसे विषय सदन में प्रमुखता से उठ सकते हैं।
इसके अलावा विभिन्न विभागों के कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है।
अनुपूरक बजट की संभावना फिलहाल कम
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि सरकार मानसून सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पेश कर सकती है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना काफी कम बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार का ध्यान अभी विधायी कार्यों और विभागीय विषयों पर अधिक केंद्रित है।
हालांकि यदि आवश्यक हुआ तो वित्तीय मामलों से जुड़े कुछ प्रस्ताव सदन में लाए जा सकते हैं, लेकिन अभी तक अनुपूरक बजट को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं।
सरकार बनाम विपक्ष: सदन में दिखेगी तीखी बहस
मानसून सत्र को लेकर विपक्ष भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। हाल के महीनों में सामने आए प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों को विपक्ष सदन में जोर-शोर से उठा सकता है।
वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को सदन के सामने रखने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में पांच दिवसीय सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
प्रदेश की राजनीति के लिए अहम होगा यह सत्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही मानसून सत्र अवधि में छोटा हो, लेकिन इसके राजनीतिक और प्रशासनिक मायने काफी बड़े हैं। सरकार के लिए यह अपनी नीतियों और योजनाओं का पक्ष रखने का अवसर होगा, जबकि विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने का प्रयास करेगा।
अब प्रदेश की निगाहें 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र पर टिकी हैं। आने वाले पांच दिनों में सदन के भीतर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले संकेत भी देखने को मिल सकते हैं।

