
दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (ethanol fuel) को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों पर आधारित है और इसके उपयोग से इंजन खराब होने या वाहन बीमा पर असर पड़ने जैसी बातें भ्रामक हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वाहन के फ्यूल टैंक के पास चींटियां दिखाई गई थीं। दावा किया गया कि पेट्रोल में गन्ने का रस या शर्करा मिलाए जाने के कारण ऐसा हो रहा है। मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में किसी प्रकार की चीनी नहीं होती। कुछ लोग पुराने वीडियो और तस्वीरों को दोबारा साझा कर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब तक कोई प्रमाणित शिकायत नहीं
सरकार (ethanol fuel) ने कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन खराब होने की अब तक कोई प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। साथ ही, E20 ईंधन के उपयोग से वाहन बीमा की वैधता पर भी कोई असर नहीं पड़ता। इस संबंध में फैलाई जा रही आशंकाओं को भी खारिज कर दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन (ethanol fuel) का सफल उपयोग हो रहा है। ब्राजील में E27 ईंधन व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल कार्यक्रम से अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
E85 ईधन लाँच किया सरकार ने
गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन भी लॉन्च किया है। यह ईंधन केवल विशेष फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियों में ही उपयोग किया जा सकेगा। सरकार बायोफ्यूल और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

