ChhattisgarhBilaspurRaipur

भूपेश बघेल का तीखा वार: विष्णु-मोदी की ‘डबल मार’ से छत्तीसगढ़ हलाकान

रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में एक बार फिर भारी हलचल मच गई है। बीते कुछ दिनों से शांत नजर आ रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अचानक अपने तेवर बेहद तल्ख कर लिए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद भूपेश बघेल एक बार फिर अपने पुराने और आक्रामक अंदाज में लौट आए हैं। इस बार उनके निशाने पर सीधे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की विष्णुदेव साय सरकार है।

हाल ही में राजधानी रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर तिल्दा विकासखंड के ग्राम देवरी और अल्दा में भूपेश बघेल की दहाड़ सुनाई दी थी, जिसकी गूंज अब न्यायधानी बिलासपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक महसूस की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पूरे तथ्यों के साथ मीडिया के सामने आकर दावों और आरोपों की ऐसी झड़ी लगाई है, जिसने प्रशासनिक और सत्ताधारी दल के खेमे में खलबली मचा दी है। बघेल का साफ कहना है कि विष्णुदेव सरकार के बीते ढाई साल प्रदेश की जनता और खुद सरकार पर ही भारी पड़ने वाले हैं।

‘दुबले को दो आषाढ़’ की तरह जनता पर दोहरी मार

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मुहावरों का तड़का लगाते हुए डबल इंजन सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की स्थिति ‘दो पाटन के बीच साबूत बचा ना कोय’ जैसी हो गई है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ी के प्रसिद्ध मुहावरे का हिंदी अनुवाद करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता इस वक्त “दुबले को दो आषाढ़” की मार झेल रही है। यानी एक तरफ केंद्र की नीतियां आम आदमी को निचोड़ रही हैं, तो दूसरी तरफ राज्य की साय सरकार अपनी नाकामियों से जनता की मुश्किलें बढ़ा रही है। केंद्र और राज्य की यह ‘डबल इंजन’ सरकार असल में छत्तीसगढ़ के विकास और जनता की जेब पर ‘डबल मार’ साबित हो रही है।

नकली खाद बेचने की साजिश का आरोप

भूपेश बघेल खुद एक प्रगतिशील किसान हैं और समय-समय पर खेतों में उतरकर खुद किसानी करते नजर आते हैं। यही वजह है कि उन्होंने प्रदेश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को बुरी तरह घेरा। उन्होंने कहा कि जून का आखिरी सप्ताह चल रहा है और छत्तीसगढ़ से मानसून रूठा हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के समय में सरकार को किसानों की ढाल बनना चाहिए था, लेकिन सरकार खुद उनके लिए आफत बन गई है।

बदहाली पर बघेल के गंभीर मुद्दे :

महंगी बिजली और ईंधन की मार: बारिश न होने के कारण किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह बिजली और पंपों पर निर्भर हैं। ऐसे समय में महंगी बिजली और ईंधन की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

खाद की भारी किल्लत: प्रदेश के सोसायटियों और बाजारों से खाद गायब है। बोआई का सीजन चरम पर है, लेकिन अन्नदाता खाद की एक-एक बोरी के लिए कतारों में खड़ा होने को मजबूर है।

नकली खाद का काला कारोबार: पूर्व मुख्यमंत्री ने बेहद सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली खाद की सप्लाई की जा रही है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की खेती और किसानों को बर्बादी के रास्ते पर धकेलने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।

बघेल ने आरोप लगाया कि साय सरकार के पास किसानों के इस संकट से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

“लोकतंत्र को खतरा, अब भाजपा वर्सेस देश का मतदाता”

आर्थिक और स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़ते हुए भूपेश बघेल ने देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्थिति पर भी बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

“मोदी और शाह की जोड़ी देश से विपक्ष को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस काम में चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था भी उनका साथ दे रही है। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी देश और जनता से जुड़ी महत्वपूर्ण अपीलों को वह तवज्जो या महत्व नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उम्मीद देश का संविधान करता है।”
– भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)

बघेल ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए कहा कि अब देश की सियासी लड़ाई किसी राजनीतिक दल बनाम भाजपा की नहीं रह गई है। अब एक तरफ भारतीय जनता पार्टी और सरकारी तंत्र (जिसमें चुनाव आयोग भी शामिल है) खड़े हैं, तो दूसरी तरफ देश का आम मतदाता अकेला खड़ा है। उन्होंने आगाह किया कि जनता से उसका सबसे पहला और बुनियादी अधिकार (निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र) छीनने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है, जिसका जवाब देश की जनता ही देगी।

छत्तीसगढ़ के ‘कका’ के इन तीखे बाणों और गंभीर आरोपों के बाद अब राज्य की सियासत का पारा चढ़ना तय माना जा रहा है। देखना होगा कि सत्ताधारी दल भाजपा भूपेश बघेल के इन आंकड़ों और आरोपों का क्या जवाब देती है।

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button