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ताजमहल में ‘तेजो महालय’ दावे पर हाईकोर्ट सख्त, ASI से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल में ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर होने के दावे पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में ताजमहल परिसर का सर्वे कराने और वहां मंदिर होने के दावे की जांच की मांग की गई है।

दरअसल, वर्ष 2015 में दायर एक मुकदमे में ताजमहल को ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर घोषित करने की मांग की गई थी। जिला अदालत ने यह मांग खारिज कर दी थी, जिसके बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अब हाईकोर्ट ने मामले में ASI और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

कैसे जांच करता है ASI?

ASI किसी भी ऐतिहासिक स्थल की जांच के लिए कई वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करता है। सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि जमीन के नीचे कोई संरचना मौजूद है या नहीं।

  • साइज़्मिक तकनीक: भूकंपीय तरंगों की मदद से जमीन के नीचे दीवार या अन्य ढांचे का पता लगाया जाता है।
  • इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक: मैग्नेटिक फील्ड में बदलाव के जरिए दबे हुए निर्माण की पहचान की जाती है।
  • ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR): इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों से जमीन के भीतर मौजूद ढांचे की 3D तस्वीर तैयार की जाती है।

यदि इन तकनीकों से किसी संरचना की पुष्टि होती है, तभी ASI सावधानीपूर्वक खुदाई करता है।

कार्बन डेटिंग और अन्य जांच

खुदाई के दौरान मिले लकड़ी, हड्डी, कोयला या अन्य जैविक अवशेषों की उम्र जानने के लिए कार्बन डेटिंग की जाती है। वहीं, शिलालेख, सिक्के और प्राचीन लिपियों के आधार पर भी किसी संरचना के समयकाल और ऐतिहासिक महत्व का आकलन किया जाता है।

अब इस मामले में ASI और केंद्र सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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