Chhattisgarh

पुरुष ने महिला बनकर लिया सरकारी योजना का लाभ

एक साल तक खाते में आते रहे हर महीने 1 हजार रुपये

खैरागढ़ | छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के मुढ़ीपार गांव में एक पुरुष(Male) ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ हासिल कर लिया। हैरानी की बात यह है कि आवेदन से लेकर सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

जानकारी के अनुसार, मुढ़ीपार निवासी त्रिलोक साहू ने महतारी वंदन योजना शुरू होने के दौरान ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन में आरोपी पुरुष(Male)स्वयं को महिला हितग्राही के रूप में दर्ज कराया। इसके बाद उसका आवेदन स्वीकृत हो गया और उसके बैंक खाते में हर महीने एक हजार रुपये की राशि जमा होती रही। करीब एक वर्ष तक उसे योजना का लाभ मिलता रहा और कुल 12 हजार रुपये उसके खाते में पहुंचे।

KYC के दौरान खुली फर्जी आवेदन की पोल

पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब लाभार्थियों के दस्तावेजों का KYC और सत्यापन अभियान चलाया गया। दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जिस व्यक्ति के नाम पर योजना का लाभ दिया जा रहा था, वह महिला नहीं बल्कि पुरुष(Male) है। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड की दोबारा जांच की गई तो कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं।

सरकारी योजनाओं के सत्यापन सिस्टम पर उठे सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात आवेदन पत्र में दर्ज जानकारी को लेकर सामने आई। आवेदन में लाभार्थी का नाम त्रिलोक साहू दर्ज था और पति के नाम वाले कॉलम में भी त्रिलोक साहू ही लिखा गया था। इतनी स्पष्ट विसंगति होने के बावजूद आवेदन को सत्यापित कर आगे बढ़ा दिया गया। इससे आवेदन की जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला खैरागढ़ परियोजना के मुढ़ीपार सेक्टर से जुड़ा है। दस्तावेजों में संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर दोनों की ओर से आवेदन को सत्यापित दिखाया गया है। वर्तमान में पोर्टल पर आवेदन की स्थिति “परमानेंट होल्ड” दर्ज है, जबकि लाभ त्याग का अनुरोध भी स्वीकृत बताया जा रहा है।

कलेक्टर ने दिए पूरे मामले की जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर इंद्रजीत चटवाल ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी संबंधित परियोजना अधिकारी को सौंपी गई है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आवेदन की जांच के दौरान किन-किन स्तरों पर लापरवाही हुई और किन अधिकारियों या कर्मचारियों ने बिना पर्याप्त जांच के आवेदन को मंजूरी दी।

10 हजार रुपये की वसूली, जांच अभी जारी

प्रशासन के अनुसार, आरोपी पुरुष(Male)से अब तक 10 हजार रुपये की राशि वापस जमा कराई जा चुकी है। शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया भी जारी है। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की आपराधिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। फिलहाल संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और अन्य मैदानी कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। ऐसे में एक पुरुष द्वारा महिला बनकर योजना का लाभ लेने का मामला सामने आने से योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना बताती है कि यदि आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन पूरी गंभीरता से नहीं किया जाए, तो सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग संभव है।

अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में केवल आवेदक जिम्मेदार है या फिर सत्यापन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही भी इस फर्जीवाड़े की बड़ी वजह बनी।

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button