शुक्रवार को संसद क्यों नहीं चलती? 4 बड़े फैक्ट्स

वैसे तो संसद की कार्यवाही हंगामे के कारण आए दिन बाधित होती है, लेकिन शुक्रवार का दिन इस मामले में खास है। पिछले दो वर्षों के रिकॉर्ड को देखें तो शुक्रवार को संसद की कार्यवाही शायद ही कभी सुचारु रूप से चली हो। मानसून सत्र 2026 में भी लगातार तीसरी बार शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित कर दी गई।
1. 2026 के बजट सत्र में तीनों शुक्रवार बेकार गए
बजट सत्र 2026 में 6, 13 और 27 फरवरी को शुक्रवार पड़ा था। इन तीनों दिन हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही एक मिनट भी नहीं चल सकी और शुरुआत में ही स्थगित कर दी गई।
2. 2025 के शीतकालीन सत्र में भी यही स्थिति रही
5, 12 और 19 दिसंबर 2025 को शुक्रवार था। इन तीनों दिनों भी संसद की कार्यवाही नहीं चल पाई। हालांकि पूरे सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 111 प्रतिशत और राज्यसभा की 100 प्रतिशत रही।
3. 2025 के मानसून सत्र में भी तीनों शुक्रवार हंगामे की भेंट चढ़े
25 जुलाई, 1 अगस्त और 8 अगस्त 2025 को शुक्रवार था। तीनों ही दिन संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पाई। बजट सत्र 2025 में भी शुक्रवार को यही तस्वीर देखने को मिली।
4. 2024 के शीतकालीन सत्र में भी शुक्रवार को कामकाज बेहद कम हुआ
29 नवंबर, 6, 13 और 20 दिसंबर 2024 को शुक्रवार था। इन चारों दिनों सदन की कार्यवाही नाम मात्र के लिए चली और शुरुआती हंगामे के बाद स्थगित कर दी गई।
शुक्रवार को निजी विधेयक के लिए रखा गया है दिन
संसद में शुक्रवार का दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद निजी विधेयकों के लिए निर्धारित होता है। कोई भी सांसद जरूरी मुद्दे पर निजी विधेयक पेश कर सकता है। विधेयक स्वीकार होने पर उस पर चर्चा और मतदान भी हो सकता है।
संविधान के अनुच्छेद 107 के तहत सांसद निजी विधेयक पेश कर सकते हैं। इसके लिए सामान्यतः एक महीने पहले नोटिस देना होता है। लोकसभा में इस पर फैसला स्पीकर और राज्यसभा में सभापति करते हैं।
आखिर शुक्रवार को संसद क्यों नहीं चलती?
इसके पीछे कई वजहें बताई जाती हैं। शुक्रवार के बाद शनिवार और रविवार को सदन की नियमित बैठक नहीं होती, इसलिए सांसद अपने संसदीय क्षेत्रों में लौटने की तैयारी करते हैं। दूसरी वजह यह है कि शुक्रवार का एक हिस्सा निजी विधेयकों के लिए निर्धारित है, जिनके पारित होने की संभावना बेहद कम रहती है।
हालांकि, संसद की कार्यवाही शुक्रवार को स्थगित होने पर भी संसद चलाने का खर्च कम नहीं होता। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार संसद की एक दिन की कार्यवाही पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।



