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Chhattisgarh

बिलासपुर में पहली बार चेंबर की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक, उद्योग-व्यापार की समस्याओं और समाधान पर मंथन

छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक पहली बार बिलासपुर में आयोजित की गई। बैठक में उद्योग और व्यापार के विकास, कारोबारियों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बिलासपुर में बैठक आयोजित होने से क्षेत्र के व्यापारियों और चेंबर से जुड़े पदाधिकारियों में उत्साह देखा गया।

बैठक में संगठन का विस्तार कर अधिक से अधिक कारोबारियों को जोड़ने, उद्योग-व्यापार को बढ़ावा देने और परिवहन से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की गई। क्षेत्र के व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि बैठक के माध्यम से बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों की समस्याओं को प्रदेश स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया जा सकेगा।

संविधान संशोधन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा

बैठक से एक दिन पहले चेंबर के संभाग कार्यकारी अध्यक्ष और संविधान संशोधन समिति के सदस्य कमल सोनी के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा रही। सोनी ने चेंबर की कार्यप्रणाली और संविधान में मौजूद असंतुलित व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया है। वे लंबे समय से संविधान में संशोधन, संतुलित नेतृत्व और प्रदेश के सभी संभागों को समान प्रतिनिधित्व देने की मांग करते रहे हैं।

9 अगस्त की कार्यकारिणी बैठक के एजेंडे में संविधान संशोधन और बिलासपुर के व्यापारियों से जुड़े मुद्दे शामिल किए गए थे, लेकिन बाद में इन्हें हटा दिया गया। सोनी ने संविधान की धारा 15 पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के लिए रायपुर और नया रायपुर क्षेत्र से जुड़ी पात्रता होने के कारण प्रदेश के अन्य क्षेत्रों को नेतृत्व में समान अवसर नहीं मिल पाता।

बिलासपुर में औद्योगिक विकास की मांग

कमल सोनी ने बिलासपुर को स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल करने और क्षेत्र में औद्योगिक पार्क विकसित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि बिलासपुर में हाईकोर्ट, रेलवे जोन के साथ कोयला, बिजली, लाइमस्टोन और जल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र की औद्योगिक संभावनाओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला।

उन्होंने क्षेत्रीय असंतुलन के कारण बिलासपुर सहित अन्य इलाकों से उद्योगों के रायपुर की ओर जाने का मुद्दा भी उठाया। वहीं चेंबर से जुड़े पदाधिकारियों ने इन मांगों को उचित नहीं बताते हुए कहा कि संविधान में संशोधन का विषय आम सभा के स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

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