हरेली पोस्टर विवाद पर चरणदास महंत का पलटवार, बोले- ‘महतारी को हटाना BJP की सोची-समझी रणनीति’

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। हरेली के सरकारी पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। महंत ने आरोप लगाया कि हरेली जैसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा से जुड़े पर्व के पोस्टर में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीर को जगह दी गई, लेकिन छत्तीसगढ़ महतारी को स्थान नहीं दिया गया।
हरेली के पोस्टर से महतारी गायब… महंत ने BJP सरकार पर साधा निशाना!
चरणदास महंत ने कहा कि यह सिर्फ एक तस्वीर के पोस्टर में होने या न होने का मामला नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, संस्कृति और अस्मिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि हरेली तिहार प्रदेश की लोक परंपरा और किसानों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। ऐसे में इसके प्रचार-प्रसार में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
‘पोस्टर से छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर गायब होना दुखद’
महंत ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहारों में से एक है। इस दिन किसान कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा करते हैं। गांवों में हरेली की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। ऐसे महत्वपूर्ण पर्व के पोस्टर से छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर गायब होना दुखद है।
उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ महतारी प्रदेश की पहचान और लोगों की भावनाओं का प्रतीक हैं। महंत ने सवाल उठाया कि जब पोस्टर में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाई गई है, तो छत्तीसगढ़ महतारी को जगह क्यों नहीं दी गई?
‘महतारी की तस्वीर हटाना सोची-समझी चाल’
चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि हरेली तिहार के पोस्टर से छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर को अलग करना सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की परंपरा और पहचान से जुड़े प्रतीकों को पीछे करने की कोशिश की जा रही है।
महंत ने आरोप लगाया कि भाजपा छत्तीसगढ़ियों को उनकी अपनी पहचान और छत्तीसगढ़ महतारी से अलग करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, यह नेता प्रतिपक्ष का राजनीतिक आरोप है और इस पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।
हरेली किसानों और लोक संस्कृति का पर्व
हरेली तिहार का सीधा संबंध छत्तीसगढ़ के किसानों और ग्रामीण जीवन से है। खेती-किसानी से जुड़े इस पर्व पर किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं। गांवों में पारंपरिक खेलों और लोक गतिविधियों का भी आयोजन होता है।
यही वजह है कि हरेली को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान माना जाता है। महंत का कहना है कि हरेली के प्रचार-प्रसार में भी इसी संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाई देनी चाहिए।
‘छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता का प्रतीक’
महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी केवल पोस्टर की एक तस्वीर नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के लोगों की भावनाओं और पहचान से जुड़ा प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ की मिट्टी, बोली, संस्कृति और परंपराओं से लोगों का गहरा जुड़ाव है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अपनी संस्कृति और परंपराओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। ऐसे में हरेली जैसे महत्वपूर्ण पर्व के पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी को जगह नहीं मिलने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पोस्टर विवाद पर आगे भी गरम सकती है सियासत
हरेली तिहार के पोस्टर को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। चरणदास महंत के बयान के बाद यह मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ रही है।
वहीं, भाजपा की ओर से इस मामले में प्रतिक्रिया आने के बाद सियासी विवाद और बढ़ सकता है। फिलहाल हरेली के पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।



