36 साल में पहली बार बदला अमेरिकी रुख, सर्जियो गोर ने श्रीनगर में कहा- कश्मीर भारत का अहम हिस्सा

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे ने भारत-अमेरिका संबंधों और कश्मीर को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। गोर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ करते हुए इसे भारत का अहम हिस्सा बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अतीत में अमेरिकी राजनयिकों के कश्मीर दौरों को लेकर विवाद होते रहे हैं।
गोर ने कहा कि वह पहली बार श्रीनगर आए हैं और यहां आकर उन्हें काफी खुशी हुई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है और दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है।
पहले अमेरिकी राजदूतों के दौरे क्यों रहे विवादों में
1990 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों के बीच अमेरिकी राजदूतों के घाटी दौरे काफी संवेदनशील माने जाते थे। 1995 में अमेरिकी राजदूत फ्रैंक विस्नर श्रीनगर पहुंचे थे। उन्होंने सरकारी अधिकारियों और मुख्यधारा के नेताओं के साथ-साथ अलगाववादी नेताओं, शिक्षाविदों, छात्रों, पत्रकारों और कारोबारी प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी। इसे लेकर भारत में सवाल उठे थे।
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने में भूमिका निभाई थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर नियंत्रण रेखा से सेना पीछे हटाने का दबाव बनाया था।
इसके बाद अमेरिकी नीति में आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर बदलाव देखने को मिला। 2002 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल ने कश्मीर का दौरा किया और नियंत्रण रेखा के हालात का जायजा लिया, लेकिन अलगाववादी नेताओं से मुलाकात नहीं की।
अब कश्मीर को लेकर बदला नजरिया
इसके बाद टिमोथी रोमर और केनेथ जस्टर समेत अमेरिकी राजदूतों ने भी कश्मीर का दौरा किया। 2020 में केनेथ जस्टर विदेशी राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। हालांकि मौजूदा दौरा कई मायनों में अलग माना जा रहा है।
सर्जियो गोर ने कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताते हुए किसी अमेरिकी मध्यस्थता या नई पहल की बात नहीं की। उनके दौरे के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में रक्षा, व्यापार, तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे मुद्दे भी अहम हैं।
गोर के बयान से संकेत मिलता है कि कश्मीर को लेकर अमेरिकी रुख पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पर केंद्रित हुआ है। उनके बयान पर पाकिस्तान की ओर से नाराजगी भी सामने आई है।



