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5 राज्यों में 1405 दागी उम्मीदवारों को टिकट, ADR ने उठाए सवाल

दिल्ली। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट में पांच राज्यों के चुनाव में राजनीतिक दलों की ओर से आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में कुल 1,405 ऐसे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे गए, जिन्होंने अपने हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए थे।

ADR ने इन पांच राज्यों की 51 राजनीतिक पार्टियों के कुल 3,539 उम्मीदवारों के चुनावी रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इनमें 1,405 प्रत्याशियों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी दी। इनमें से 1,229 उम्मीदवारों के टिकट को लेकर पार्टियों ने C-7 फॉर्म के जरिए जानकारी सार्वजनिक की। वहीं 176 उम्मीदवारों के मामले में टिकट देने का कारण सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला।

तमिलनाडु में सबसे ज्यादा जानकारी नहीं मिली

ADR के विश्लेषण में तमिलनाडु सबसे ऊपर रहा। यहां 1,162 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की जांच की गई, जिनमें 473 प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 72 उम्मीदवारों के लिए C-7 फॉर्म में टिकट देने की वजह उपलब्ध नहीं मिली।

पश्चिम बंगाल में 55, केरल में 27, पुडुचेरी में 12 और असम में 10 उम्मीदवारों के C-7 खुलासे उपलब्ध नहीं थे। पुडुचेरी में स्थिति खास तौर पर सामने आई, जहां 112 उम्मीदवारों में से 39 यानी करीब 35 प्रतिशत ने आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें केवल 12 उम्मीदवारों को टिकट देने की वजह उपलब्ध थी।

लोकप्रियता और सामाजिक कार्य जैसे कारण

ADR ने केवल जानकारी गायब होने पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि राजनीतिक दलों की ओर से दिए गए कारणों की गुणवत्ता पर भी आपत्ति दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार कई उम्मीदवारों के लिए टिकट देने की वजह बताते समय लोकप्रियता, सामाजिक कार्य, राजनीतिक अनुभव, योग्यता और अच्छी छवि जैसे सामान्य कारणों का इस्तेमाल किया गया।

कई मामलों में उम्मीदवारों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा भी लगभग एक जैसी थी। इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रत्येक उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड, राजनीतिक पृष्ठभूमि और योग्यता को अलग-अलग आधार बनाकर टिकट देने की वजह तैयार की गई या केवल औपचारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई।

तमिलनाडु की पार्टियों के जवाबों पर सवाल

ADR ने तमिलनाडु में भाजपा, AIADMK, DMK और TVK के कुछ उम्मीदवारों के C-7 फॉर्म का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में टिकट देने के कारण बताते समय एक जैसे शब्दों और समान भाषा का इस्तेमाल दिखाई दिया।

ADR के अनुसार इससे उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। खासकर तब, जब संबंधित उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की हो और पार्टियों को उनके चयन का कारण भी सार्वजनिक करना हो।

ADR ने रिपोर्ट की सीमा भी स्पष्ट की

ADR ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी रिपोर्ट चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की वेबसाइट तथा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध C-7 संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संभव है कि कुछ राजनीतिक दलों ने ये जानकारियां किसी अन्य माध्यम से जारी की हों, जो ADR के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाईं।

इस वजह से रिपोर्ट में जानकारी उपलब्ध नहीं होने वाले मामलों को सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन नहीं माना गया है। ADR ने इन्हें सार्वजनिक रिकॉर्ड में जानकारी उपलब्ध नहीं होने के रूप में दर्ज किया है। रिपोर्ट का मुख्य फोकस राजनीतिक दलों की ओर से आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारणों और उन कारणों की सार्वजनिक उपलब्धता पर है।

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