इंस्टेंट लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, ब्याज से लेकर ऐप की परमिशन तक ऐसे करें जांच

ऑनलाइन लोन ऐप कुछ ही मिनटों में पैसे उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, लेकिन कर्ज लेने से पहले सिर्फ ब्याज दर या जल्दी मंजूरी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। लोन की कुल लागत, अतिरिक्त शुल्क, लोन देने वाली संस्था और ऐप द्वारा मांगी जाने वाली फोन परमिशन की जांच करना भी जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया लोन बाद में अतिरिक्त खर्च और डेटा प्राइवेसी से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।
लोन देने वाली संस्था की करें पहचान
लोन ऐप पर दिखने वाला नाम हमेशा वास्तविक लेंडर का नाम नहीं हो सकता। कुछ ऐप बैंक या एनबीएफसी के लिए लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले यह पता करें कि रकम किस बैंक या एनबीएफसी की ओर से दी जा रही है। इसकी जानकारी संबंधित संस्था की वेबसाइट या भारतीय रिजर्व बैंक की डिजिटल लेंडिंग ऐप डायरेक्टरी से भी जांची जा सकती है।
अगर कोई ऐप लोन देने वाली संस्था की जानकारी स्पष्ट नहीं करता, किसी व्यक्तिगत खाते में पैसे जमा करने को कहता है या लोन से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता है, तो सावधानी बरतनी चाहिए।
सिर्फ ब्याज दर नहीं, पूरी लागत देखें
कम ब्याज दर का विज्ञापन देखकर तुरंत लोन लेने का फैसला न करें। लोन की वास्तविक लागत जानने के लिए की फैक्ट स्टेटमेंट यानी KFS में दिए गए APR और अन्य शुल्कों को देखें। इसमें प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, देर से भुगतान का शुल्क, पेनल्टी और प्री-पेमेंट से जुड़ी लागत की जानकारी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर 50 हजार रुपये के लोन में फीस पहले ही काट ली जाती है तो खाते में पूरी रकम जमा नहीं हो सकती। इसलिए खाते में वास्तव में मिली रकम और पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल राशि की तुलना जरूर करें। KFS में शामिल नहीं किए गए शुल्क बाद में लेने की अनुमति नहीं होती।
फोन की परमिशन पर भी दें ध्यान
लोन ऐप डाउनलोड करते समय यह देखना जरूरी है कि वह फोन में किस तरह की परमिशन मांग रहा है। डिजिटल लेंडिंग के नियमों के तहत डेटा संग्रह जरूरत के मुताबिक और स्पष्ट सहमति के आधार पर होना चाहिए। ऐप को कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग और फाइल या मीडिया जैसे संसाधनों का एक्सेस नहीं लेना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर स्पष्ट अनुमति के साथ कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर कोई ऐप कॉन्टैक्ट, गैलरी या कॉल हिस्ट्री जैसी जानकारी मांगता है, तो उसकी जरूरत और डेटा के इस्तेमाल के बारे में जानकारी लें।
लोन स्वीकार करने से पहले KFS पढ़ें
लोन की स्वीकृति से पहले KFS में लोन की रकम, अवधि, ब्याज दर, APR, EMI या रीपेमेंट शेड्यूल, पेनल्टी, रिकवरी प्रक्रिया और कूलिंग-ऑफ पीरियड जैसी जानकारी जांचें। KFS, स्वीकृति पत्र और लोन एग्रीमेंट की कॉपी सुरक्षित रखना भी उपयोगी है।
जल्दी मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं कि तुरंत लोन ले लेना चाहिए। पहले यह देखें कि कुल कितनी रकम वापस करनी होगी और EMI आपकी मौजूदा देनदारियों के हिसाब से संभालने योग्य है या नहीं। साथ ही, डिजिटल लोन की जानकारी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को दी जा सकती है, इसलिए छोटे या कम अवधि के लोन का भी क्रेडिट रिकॉर्ड पर असर पड़ सकता है।



