SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद के सवालों पर सफाई, आयोग ने कहा- फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं

आयोग के फैसलों पर उठे सवाल
बिहार में जून 2025 से शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच आयोग के भीतर फैसलों को लेकर असहमति सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों और विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण के जरिए पात्र मतदाताओं का विवरण दुरुस्त करना और अपात्र नामों की पहचान करना है। इस प्रक्रिया के तहत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया गया है। इस दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
चुनाव आयोग ने दी सफाई
इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आयोग के सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था के तौर पर सभी सदस्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। इस तरह किसी एक सदस्य या दो सदस्यों को जानबूझकर प्रक्रिया से अलग रखने के आरोप को आयोग ने खारिज किया है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा
SIR के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसमें शामिल नामों को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न पक्षों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसी वजह से आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया भी चर्चा में आई है।
रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से अलग-अलग मौकों पर आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। ऐसे में SIR को लेकर जारी बहस में एक ओर आयोग की आधिकारिक सफाई है, जबकि दूसरी ओर उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्ट के दावे हैं।



