जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की बढ़ी भागीदारी पर दिया जोर, ऊर्जा सुरक्षा से AI तक उठाए अहम मुद्दे

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ देशों की उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक में विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का सीधा असर झेल रहे हैं, लेकिन निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने मौजूदा वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी बताई।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक बाधाओं, निवेश में बिखराव और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन परिस्थितियों में विकासशील देशों के हितों को वैश्विक एजेंडे में पर्याप्त जगह देना जरूरी है।
सप्लाई चेन और ऊर्जा-खाद्य सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ को सप्लाई चेन, वित्त और कनेक्टिविटी से जुड़े ऐसे अवरोधों को स्वीकार नहीं करना चाहिए, जो देशों की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता और कीमतों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा को भी साझा प्राथमिकता बताते हुए अनाज और उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को जल्द दूर करने की जरूरत बताई। जयशंकर ने ऐसी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया, जो विकासशील देशों की उत्पादन क्षमता और औद्योगीकरण को बढ़ावा दें।
समुद्री सुरक्षा और AI सहयोग पर भारत का रुख
जयशंकर ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और नाविकों तथा वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में समुद्री मार्गों की अहम भूमिका है, इसलिए इनकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर उन्होंने कहा कि तकनीक के तेजी से विकास के बीच नया डिजिटल विभाजन नहीं बनना चाहिए। भारत ने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच स्वदेशी रूप से विकसित AI उपकरणों और तकनीकी ढांचे को साझा करने का सुझाव दिया। उन्होंने AI को मानव-केंद्रित बनाए रखने पर भी जोर दिया।
जलवायु कार्रवाई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग
जयशंकर ने जलवायु कार्रवाई के लिए विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे से जुड़े मंचों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को अपने मौजूदा बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल साझा चिंताओं को वैश्विक एजेंडे में प्रमुखता से रखने के लिए करना चाहिए। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र और व्यापक बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार को भी जरूरी बताया, ताकि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं और हितों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी स्थान मिल सके।



