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छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अक्टूबर से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, साइंस और गणित की होंगी लाइव क्लास

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था तैयार की है। अक्टूबर 2026 से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साइंस और गणित जैसे कठिन विषयों की संभागवार ऑनलाइन लाइव कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन लाइव क्लास में विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे और पढ़ाई के दौरान आने वाली उनकी शंकाओं का समाधान भी करेंगे।

नई व्यवस्था का खास फोकस उन सरकारी स्कूलों पर रहेगा, जहां भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान और गणित जैसे विषयों के पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, दीक्षा पोर्टल और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों से जोड़ने की तैयारी है।

इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग ने दिसंबर 2026 तक पाठ्यक्रम पूरा कराने का लक्ष्य तय किया है। विभाग की ओर से स्कूलों में पढ़ाई की नियमित निगरानी के साथ विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता मजबूत करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी जोर दिया गया है।

अक्टूबर से संभाग स्तर पर शुरू होंगी लाइव क्लास

स्कूल शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के तहत अक्टूबर से संभाग स्तर पर ऑनलाइन लाइव कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इन कक्षाओं में विज्ञान और गणित के अलग-अलग विषयों को विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाएगा।

भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान और गणित जैसे विषयों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का अवसर देना है, जहां संबंधित विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

लाइव कक्षाओं के दौरान विद्यार्थी विषय से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और अपनी शंकाओं का समाधान भी कर सकेंगे। स्कूलों को इन कक्षाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं पढ़ाई की प्रगति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल माध्यम से होगी पढ़ाई

जहां विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। स्कूलों में मौजूद स्मार्ट बोर्ड, दीक्षा पोर्टल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों की मदद से विद्यार्थियों को लाइव कक्षाओं से जोड़ा जाएगा।

विभाग का उद्देश्य यह है कि शिक्षकों की कमी के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके लिए स्कूलों को निर्धारित ब्लूप्रिंट के अनुसार पढ़ाई कराने और समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

दिसंबर तक पूरा करना होगा सिलेबस

स्कूल शिक्षा विभाग ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में दिसंबर तक पाठ्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। विभाग के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक सत्र में करीब 49 अध्यापन दिवस ही शेष हैं। ऐसे में स्कूलों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने और तय समयसीमा में सिलेबस पूरा करने पर विशेष ध्यान देना होगा।

स्कूलों में पढ़ाई की नियमित निगरानी भी की जाएगी। विभाग ने पाठ्यपुस्तक की जगह बाजार में उपलब्ध गाइड से पढ़ाने के मामलों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाना और उनकी समझ को मजबूत करना है।

कक्षा 5वीं से 8वीं तक बुनियादी शिक्षा पर फोकस

नई योजना में कक्षा 5वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

विभाग ने लक्ष्य रखा है कि सभी विद्यार्थी हिंदी और अंग्रेजी को धाराप्रवाह पढ़ने में सक्षम हों। इसके साथ ही विद्यार्थियों को 20 से 25 तक के पहाड़े कंठस्थ कराने का लक्ष्य भी रखा गया है।

दिसंबर तक इन लक्ष्यों को हासिल करने वाले बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों को सम्मानित करने की योजना भी बनाई गई है। इससे स्कूलों में विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

बैगलेस डे पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

हर शनिवार आयोजित होने वाले बैगलेस डे का उपयोग अब विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए भी किया जाएगा।

कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी कराई जाएगी। इनमें साइंस ओलंपियाड, NMMS, श्रेष्ठ, नवोदय और प्रयास जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।

इसके जरिए शुरुआती कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न और प्रश्नों की तैयारी का अवसर मिलेगा।

एमडीएम को लेकर भी नए निर्देश

स्कूल शिक्षा विभाग ने मध्याह्न भोजन यानी MDM को लेकर भी स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सेंट्रल किचन वाले स्कूलों को छोड़कर अन्य स्कूलों में भोजन परिसर में ही तैयार किया जाएगा। रसोईघर की नियमित सफाई और पोताई कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एक्सपायरी डेट वाले मसालों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी।

बच्चों को भोजन परोसने से पहले भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए पहले रसोइया और उसके बाद शिक्षक को भोजन चखना अनिवार्य होगा।

वहीं स्वामी आत्मानंद स्कूलों में विद्यार्थियों को घर से टिफिन लाने के बजाय स्कूल में तैयार भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पढ़ाई के साथ गुणवत्ता और निगरानी पर जोर

स्कूल शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था में सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समझ, बुनियादी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी जोर दिया गया है।

अक्टूबर से शुरू होने वाली लाइव कक्षाओं के जरिए विषय शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाएगा। वहीं दिसंबर तक सिलेबस पूरा कराने, विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी और एमडीएम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देशों से स्कूलों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को और व्यवस्थित करने पर फोकस किया गया है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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