Follow Us on Our Social Media
National

SIR विवाद के बीच 36 घंटे में बदली तस्वीर, तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक से BJP के 12 मुख्यमंत्रियों के समर्थन तक; जानें पूरा घटनाक्रम

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद की खबरों के बाद SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर विवाद तेज हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, वोटर डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR पर सवाल उठाने तेज कर दिए। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई, चुनाव आयोग ने SIR और आंतरिक कामकाज को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया और 27 सितंबर को BJP ने 12 मुख्यमंत्रियों के जरिए आयोग और CEC के समर्थन में बयान दिए।

1. चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की खबर

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक अधिकारियों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में SIR के बाद दाखिल अपील और गोवा में सॉफ्टवेयर से जुड़ा मामला शामिल था।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने चुनावी रोल के डेटाबेस के कथित केंद्रीकरण और IT सिस्टम से जुड़े अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई थी। गोवा में 97 ऐसे मतदाताओं का मामला सामने आया, जिन्हें ERO ने पात्र माना था, लेकिन सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या के कारण उनका फैसला दर्ज नहीं हो सका।

2. बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

इस विवाद के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच में एक याचिका दाखिल की गई। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की ओर से लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग भी की है।

याचिका में महाराष्ट्र में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और राज्य में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। हालांकि, याचिका दाखिल होना अपने आप में लगाए गए आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है।

3. सुप्रीम कोर्ट में SIR का मामला

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि SIR चुनावी कानूनों और संविधान के प्रावधानों के साथ सीधे टकराव में नहीं है और इसे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा सकता है।

वहीं, पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग मौकों पर दस्तावेजों, सत्यापन और मतदाताओं की सुनवाई से संबंधित निर्देश भी दिए हैं। फरवरी 2026 के एक आदेश में कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच और अंतिम मतदाता सूची से जुड़े निर्देश जारी किए थे।

इसलिए SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अलग-अलग पहलुओं पर न्यायिक कार्यवाही भी जारी रही है।

4. 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक

विवाद के बीच 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने निर्वाचन सदन में बैठक की। यह बैठक मीडिया रिपोर्टों में सामने आए कथित मतभेदों के बाद तीनों की सार्वजनिक रूप से सामने आई महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक थी। बैठक के बाद आयोग ने SIR और अपने आंतरिक कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण जारी किया।

ECI ने कहा कि देशभर में SIR कराने का आदेश तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। आयोग ने नए मतदाताओं के Form-6 और SIR नोटिस से जुड़े मुद्दों पर भी अपना पक्ष रखा।

5. SIR की प्रक्रिया में क्या बदलाव बताए गए?

आयोग ने बताया कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर BLO मतदाता के घर जाकर दस्तावेज ले सकेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। सुनवाई की आवश्यकता होने पर ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

बैठक के बाद तीनों चुनाव आयुक्तों की तस्वीर भी जारी की गई, जिसे आयोग की ओर से सार्वजनिक रूप से एकजुटता का संदेश देने के कदम के रूप में देखा गया।

6. 27 सितंबर को BJP ने 12 मुख्यमंत्रियों को मैदान में उतारा

27 सितंबर को BJP ने 12 मुख्यमंत्रियों के जरिए अलग-अलग राज्यों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के समर्थन में बयान दिए। BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग के पक्ष में अपना रुख रखा।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR तथा CEC की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठा रहे थे। इस तरह मामला अब चुनाव आयोग के भीतर की कथित असहमति से आगे बढ़कर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा सवाल उठे?

रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से ये मुद्दे रहे:

– Form-6 में बदलाव: नए मतदाताओं के आवेदन में पिछली SIR सूची में आवेदक या उसके माता-पिता/दादा-दादी के नाम से जुड़ा सवाल जोड़ा गया था।

– वोटर डेटा तक पहुंच: दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और EROs की पहुंच से जुड़े सवाल उठाए थे।

– पश्चिम बंगाल में अपील: SIR के बाद मतदाताओं के नाम से जुड़े मामलों में दाखिल अपीलों की प्रक्रिया और प्राधिकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे।

– गोवा में 97 मतदाता: ERO द्वारा पात्र माने गए 97 लोगों के मामलों को सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या के कारण दर्ज नहीं किए जा पाने का मुद्दा रिपोर्ट में सामने आया।

36 घंटे में तीन मोर्चों पर घटनाक्रम

कुल मिलाकर, विवाद सामने आने के बाद करीब 36 घंटे के भीतर न्यायपालिका, चुनाव आयोग और राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक ओर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई और SIR से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जारी रहे, वहीं चुनाव आयोग ने तीनों आयुक्तों की बैठक के बाद अपने रुख पर स्पष्टीकरण दिया। इसके अगले दिन BJP ने 12 मुख्यमंत्रियों के जरिए आयोग के समर्थन में बयान दिए।

वहीं, आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में उठाए गए सवाल और ECI के स्पष्टीकरण—दोनों सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। इन दावों और उनके कानूनी प्रभाव पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक और संस्थागत प्रक्रियाओं से ही सामने आएगा।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button