भारत की बिजली कूटनीति से पड़ोसी देशों में बढ़ी पकड़, नेपाल-भूटान के बाद श्रीलंका पर नजर

भारत ने पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के लिए बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और पावर ट्रेडिंग को कूटनीतिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। नेपाल और भूटान के साथ बिजली व्यापार के बाद अब श्रीलंका को भी भारतीय पावर ग्रिड से जोड़ने की तैयारी पर काम चल रहा है। इससे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल में चीनी परियोजनाओं को झटका
नेपाल में चीन की मदद से तैयार किए गए कई बुनियादी ढांचा और ऊर्जा प्रोजेक्ट चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारत ने चीन की फंडिंग वाले कुछ बिजली प्रोजेक्ट्स से बिजली खरीदने से दूरी बनाए रखी है। हाल में बाढ़ से नेपाल का अपर त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुआ, जिससे देश की बिजली उत्पादन क्षमता को नुकसान पहुंचा। इस परियोजना के लिए नेपाल पर करीब 149.4 मिलियन डॉलर के चीनी कर्ज का बोझ भी है।
इसके मुकाबले भारत नेपाल से बिजली खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। बिजली व्यापार से नेपाल को हर साल करीब 130.8 मिलियन डॉलर का राजस्व मिलने की बात सामने आई है। इससे नेपाल के लिए भारत के साथ ऊर्जा सहयोग आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
भूटान को बिजली कारोबार से बड़ा फायदा
भूटान ने भारत के साथ हाइड्रोपावर सहयोग को प्राथमिकता दी है। भारतीय कंपनियां वहां बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं। टाटा और अडानी समूह से जुड़े 5000-5000 मेगावाट क्षमता के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
भारत को बिजली बेचकर भूटान ने वर्ष 2025 में करीब 250 मिलियन डॉलर की कमाई की। यह राशि नेपाल की बिजली बिक्री से होने वाली आय से अधिक बताई गई है। भूटान की जलविद्युत क्षमता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
श्रीलंका को भारतीय ग्रिड से जोड़ने की तैयारी
भारत की ऊर्जा कनेक्टिविटी योजना अब श्रीलंका तक पहुंचाने की तैयारी है। भारत के न्यू मदुरै को श्रीलंका के मन्नार से जोड़ने के लिए करीब 500 मेगावाट क्षमता की ट्रांसमिशन लाइन पर विचार किया जा रहा है।
यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो भारत और श्रीलंका के बीच बिजली का सीधा आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। नेपाल और भूटान के साथ मौजूदा ऊर्जा सहयोग तथा श्रीलंका के साथ प्रस्तावित कनेक्टिविटी को मिलाकर भारत दक्षिण एशिया में एक व्यापक क्षेत्रीय ऊर्जा नेटवर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



