स्मृति ईरानी को मिलेगी छत्तीसगढ़ प्रभारी की कमान..!

रायपुर: स्मृति ईरानी बनाई जा सकती हैं, छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी। सुनकर हर किसी को झटका लग सकता है, लेकिन स्मृति ईरानी के नाम पर मुहर लग जाए, तो हैरानी स्वाभाविक भी है। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक गलियारों में इन दिनों छत्तीसगढ़ के नए प्रदेश प्रभारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक सूत्रों के हवाले से इस वक्त सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आने वाला नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का है । छत्तीसगढ़ में प्रदेश प्रभारी का पद खाली होने के बाद अब केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही राज्य को नया संगठन सारथी सौंपने की तैयारी में है।
छत्तीसगढ़ प्रभारी: भाजपा में शीर्ष पद तक पहुंचने का ‘लकी चार्म’
भाजपा के संगठनात्मक इतिहास में छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी का पद केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पदोन्नति का जरिया भी माना जाता रहा है।
जगत प्रकाश नड्डा: डॉ. रमन सिंह के शासनकाल में जेपी नड्डा लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहे। इसके बाद वे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बने और आगे चलकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के शीर्ष पद तक पहुंचे।
नितिन नबीन: छत्तीसगढ़ में भाजपा को विपक्ष से सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले नितिन नबीन की संगठनात्मक क्षमता का ही नतीजा रहा कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई।
यही वजह है कि कई कद्दावर राष्ट्रीय नेता छत्तीसगढ़ के सांगठनिक प्रभार को लेकर खासी रुचि दिखा रहे हैं।
प्रभारी की दौड़ में शामिल प्रमुख नाम
प्रदेश प्रभारी की कमान संभालने के लिए केंद्रीय और प्रादेशिक स्तर पर कई दिग्गजों के नामों पर मंथन चल रहा है:
स्मृति ईरानी: प्रखर वक्ता और अमेठी से पूर्व सांसद, जिनकी लोकप्रियता राष्ट्रीय स्तर पर है।
धर्मेंद्र प्रधान: अनुभवी रणनीतिकार और कई राज्यों के सफल चुनावी प्रभारी।
रविशंकर प्रसाद: संगठन और मीडिया प्रबंधन के माहिर पूर्व केंद्रीय मंत्री।
डी. पुरंदेश्वरी: पूर्व प्रदेश प्रभारी, जो पहले भी राज्य संगठन के साथ कार्य कर चुकी हैं।
स्मृति ईरानी क्यों हैं सबसे मजबूत दावेदार?
छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनावों और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति के लिहाज से स्मृति ईरानी को ‘तुरुप का इक्का’ माना जा रहा है:
आधी आबादी (महिला वोटर्स) पर प्रभाव: छत्तीसगढ़ के कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या निर्णायक है। ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी योजनाओं के बाद भाजपा महिला वोट बैंक को साधे रखने के लिए एक मजबूत महिला चेहरे को आगे करना चाहती है।
भाषाई और संवाद कौशल: जहां डी. पुरंदेश्वरी के साथ हिंदी भाषी क्षेत्र में संवाद की कुछ सीमाएं थीं, वहीं स्मृति ईरानी का हिंदी भाषण कौशल और आक्रामक तेवर कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के लिए सटीक माना जा रहा है।
चुनौतियों से टकराने का अनुभव: गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में सेंध लगाने वाली छवि के कारण स्मृति ईरानी की राजनीतिक समझ को कठिन परिस्थितियों में कारगर माना जाता है।
बस्तर से सरगुजा तक संतुलन: प्रदेश के आदिवासी अंचलों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जमीनी कार्यकर्ताओं में समन्वय स्थापित करने के लिए हाई-प्रोफाइल और मुखर नेतृत्व की जरूरत महसूस की जा रही है।
विपक्ष की घेराबंदी: कांग्रेस के आक्रामक बयानों और स्थानीय मुद्दों पर तुरंत पलटवार करने के लिए भाजपा को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो राष्ट्रीय मंचों के साथ स्थानीय मीडिया में भी पूरी मजबूती से बात रख सके।
सत्ता और संगठन के समन्वय की चुनौती
विष्णुदेव साय सरकार के कार्यकाल के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचते ही भाजपा संगठन में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं चाहता। आने वाले दिनों में चार बड़े नगर निगमों सहित कई नगरीय निकायों में चुनाव होने हैं। ऐसे में नए प्रभारी के सामने न केवल कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और सत्ता-संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की भी बड़ी चुनौती होगी।
यद्यपि जब तक केंद्रीय आलाकमान की ओर से आधिकारिक सूची जारी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं मानी जा सकती। फिर भी, सियासी समीकरण और रणनीतिक जरूरतें इस समय स्मृति ईरानी के पक्ष में झुकती दिख रही हैं।




