9 राज्यों में मौसम बदलेगा; यूपी में 10 नदियां उफान पर, बिहार के 466 गांव बाढ़ की चपेट में

दिल्ली7 देश के ज्यादातर हिस्सों से मानसून (MAUSAM) की विदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन कई राज्यों में बारिश का दौर अभी जारी है। मध्य प्रदेश में चक्रवात के असर से अगले चार दिन बारिश होने का अनुमान है।
इसके अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम बदलने के कारण कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट और ठंडक बढ़ने लगी है।
यूपी में आंधी-बारिश के साथ ओले, फसलों को नुकसान
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में सोमवार रात तेज आंधी के साथ बारिश हुई। कई इलाकों में ओले भी गिरे। तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के पोल गिर गए। खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद उत्तर प्रदेश की करीब 10 नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। लखनऊ, सीतापुर समेत 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार आठवें दिन बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे के इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है।
लखनऊ में 40 हजार घरों में पानी
लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां करीब 40 हजार घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है। बाढ़ का पानी धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है। मां चंद्रिका देवी मंदिर और हनुमंत धाम परिसर में भी पानी घुस गया है।
लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह में करीब 20 साल बाद पानी पहुंचा है। इससे पहले 2006 में मंदिर के गर्भगृह में ऐसी स्थिति बनी थी। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
बिहार में 8 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
बिहार में भी बाढ़ (MAUSAM) की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के छह जिलों के करीब 466 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ से लगभग 8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने करीब 92,730 बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
सारण जिले में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बताया गया है। यहां करीब 3.55 लाख लोग प्रभावित हैं। गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। खगड़िया में गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
राज्य में मानसून की विदाई भी सामान्य समय से पहले शुरू हो गई है। दक्षिण-पश्चिम बिहार के पटना समेत कई जिलों से मानसून लौट चुका है। सामान्य तौर पर बिहार से मानसून की विदाई 10 से 11 अक्टूबर के आसपास होती है, लेकिन इस बार करीब एक सप्ताह पहले ही इसके लौटने की स्थिति बन गई है। इसके बावजूद आज राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है।
एमपी में अगले चार दिन बारिश
मध्य प्रदेश में चक्रवात के असर से अगले चार दिन बारिश होने का अनुमान है। प्रदेश के नौ जिलों में मौसम प्रभावित हो सकता है। वहीं इंदौर में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में यहां तापमान 37 डिग्री के पार जा सकता है।
बारिश की संभावना के साथ दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंडक का असर देखने को मिल सकता है। मौसम में बदलाव के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
राजस्थान में रातें ठंडी, 12 अक्टूबर से बारिश के आसार
राजस्थान में सोमवार को तापमान में गिरावट के बाद रात के समय ठंडक बढ़ गई। माउंट आबू में न्यूनतम तापमान करीब 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलोदी, श्रीगंगानगर, चूरू और बीकानेर में दिन के तापमान में करीब दो डिग्री तक गिरावट हुई।
मौसम विभाग के अनुसार 12 अक्टूबर से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने के बाद राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
उत्तराखंड के 8 जिलों में यलो अलर्ट
उत्तराखंड में मौसम (MAUSAM) ने करवट लेना शुरू कर दिया है। राज्य के आठ जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
पहाड़ी इलाकों में बारिश और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी की संभावना है। नैनीताल में सुबह से धुंध छाई रही। मौसम में बदलाव के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने लगी है।
9 राज्यों में बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। मानसून की विदाई के बावजूद चक्रवाती सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ के असर से अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
इस दौरान तेज हवा, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की स्थिति बन सकती है। किसानों को फसल और स्थानीय प्रशासन को जलभराव तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत है।



