काकोरी ट्रेन एक्शन के वीर क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह की कहानी, देश के लिए हंसते-हंसते दे दी जान

नई दिल्ली। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में काकोरी ट्रेन एक्शन का नाम देश के वीर क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान की याद दिलाता है। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने काकोरी के पास सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को रोककर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। इस अभियान से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
कौन थे ठाकुर रोशन सिंह?
ठाकुर रोशन सिंह का जन्म 22 जनवरी 1892 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। वे शुरुआत से ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सक्रिय रहे। असहयोग आंदोलन के दौरान भी उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़ गए और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
काकोरी कांड में क्या थी भूमिका?
ठाकुर रोशन सिंह को आमतौर पर काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिना जाता है, हालांकि ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने 9 अगस्त 1925 की ट्रेन कार्रवाई में सीधे हिस्सा नहीं लिया था। इसके बावजूद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें काकोरी षड्यंत्र मामले से जुड़े मुकदमे में गिरफ्तार किया। उन पर 1924 के बमरौली डकैती मामले में हत्या से संबंधित आरोप लगाए गए और मुकदमे के बाद उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।
19 दिसंबर 1927 को दी गई फांसी
ब्रिटिश सरकार ने ठाकुर रोशन सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान को 19 दिसंबर 1927 को फांसी दे दी। राजेंद्र लाहिड़ी को इससे दो दिन पहले 17 दिसंबर को ही फांसी दे दी गई थी। रोशन सिंह का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अमर हो गया।
काकोरी ट्रेन एक्शन ने ब्रिटिश शासन को सीधी चुनौती दी थी। इस घटना ने देशभर के युवाओं में क्रांतिकारी भावना को मजबूत किया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



