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कर्बला की याद के साथ युद्ध की त्रासदी: ईरान में गम और श्रद्धांजलि के बीच मनाया गया मुहर्रम

मुहर्रम और यौमे आशूरा के अवसर पर इस वर्ष ईरान में मातम का माहौल पहले की तुलना में अधिक भावुक रहा। कर्बला के शहीदों की याद के साथ हालिया युद्ध में जान गंवाने वाले सैन्य अधिकारियों, नेताओं और आम नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी गई। देशभर में मातमी जुलूस निकाले गए, धार्मिक आयोजन हुए और जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरित किया गया।

कर्बला की शहादत के साथ युद्ध में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि

ईरान के विभिन्न शहरों और गांवों में लाखों लोगों ने काले वस्त्र धारण कर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। आशूरा के मौके पर मातमी जुलूस निकाले गए, नौहे पढ़े गए और लोगों ने सीना पीटकर शोक व्यक्त किया। इस वर्ष धार्मिक आयोजनों में हालिया युद्ध में जान गंवाने वाले लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिससे मुहर्रम का माहौल और अधिक भावनात्मक बन गया।

शिया मुस्लिम समुदाय के लिए आशूरा का विशेष महत्व है। वर्ष 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी शहादत को आज भी सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

देशभर में निकले मातमी जुलूस, बांटा गया नज़री भोजन

मुहर्रम के दौरान ईरान के विभिन्न हिस्सों में ताजिया और मातमी जुलूस निकाले गए। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की याद में धार्मिक रस्में निभाईं और बड़ी संख्या में लोगों ने ‘नज़री’ के रूप में मुफ्त भोजन वितरित किया। इसे सेवा, करुणा और मानवता के संदेश का प्रतीक माना जाता है।

आशूरा से एक दिन पहले तासुआ भी मनाया गया। इस अवसर पर हजरत अब्बास को याद किया गया, जिन्होंने कर्बला में प्यासे बच्चों और महिलाओं के लिए पानी लाने का प्रयास करते हुए शहादत दी थी। ईरान के अलावा कई अन्य देशों में भी शिया समुदाय ने मातमी कार्यक्रम आयोजित किए।

कर्बला में उमड़े जायरीन, धार्मिक आयोजनों में बड़ी भागीदारी

मुहर्रम के अवसर पर ईरान सहित विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में जायरीन इराक के पवित्र शहर कर्बला पहुंचे, जहां इमाम हुसैन की दरगाह पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। धार्मिक सभाओं, मजलिसों और शोक आयोजनों में हजारों लोगों ने भाग लिया।

धार्मिक विद्वानों ने अपने संबोधनों में इमाम हुसैन के बलिदान, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के संदेश को दोहराया। इस वर्ष मुहर्रम के आयोजन कर्बला की ऐतिहासिक स्मृति के साथ-साथ हालिया संघर्षों में प्रभावित लोगों की याद को भी समर्पित रहे।

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