
नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी वतन वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत में निर्वासन का जीवन बिता रहीं शेख हसीना ने कहा कि वह इसी साल बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें मौत की सजा या राजनीतिक साजिशों से डर नहीं लगता और उनका संघर्ष लोकतंत्र की बहाली के लिए है।
‘मौत से नहीं डरती, पूरा परिवार खो चुकी हूं’
एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ न्यायपालिका का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है ताकि अवामी लीग को नेतृत्वविहीन किया जा सके। उन्होंने कहा, “मैं मौत से नहीं डरती। 1975 में मैंने अपने माता-पिता, भाइयों और लगभग पूरे परिवार को खो दिया था। मुझ पर ग्रेनेड हमला भी हुआ, लेकिन हर बार मैं लोगों के साथ खड़ी रही।”
‘सत्ता नहीं, लोगों के अधिकारों के लिए करती हूं राजनीति’
शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का विषय नहीं है। उनका उद्देश्य बांग्लादेश में लोकतंत्र, कानून का शासन और लोगों के राजनीतिक अधिकारों की बहाली है। उन्होंने कहा कि वह सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश के लोगों के हित और राष्ट्रपिता शेख़ मुजीबुर रहमान के ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को पूरा करने के लिए राजनीति करती हैं।
अवामी लीग की वापसी पर भी जताया भरोसा
राजनीतिक वापसी के सवाल पर शेख हसीना ने कहा कि आवामी लीग को लोगों के दिलों से नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कार्यालय बंद किए जा सकते हैं और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन जनता का समर्थन अब भी उनके साथ है। उनके मुताबिक, पार्टी के समर्थन में रैलियां और कार्यक्रम हो रहे हैं, जो इसकी वापसी के संकेत हैं।
‘देश में बढ़ रहा चरमपंथ’
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि 5 अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम की भावना को कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान, स्मारकों पर हमले, अल्पसंख्यकों, मंदिरों और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, यह देश की मूल पहचान पर हमला है और बांग्लादेश को गलत दिशा में ले जा रहा है।
BNP से बातचीत की अटकलों को किया खारिज
Bangladesh Nationalist Party (BNP) के साथ कथित बैकचैनल बातचीत के सवाल पर शेख हसीना ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, चुनावी अधिकार और न्याय जैसे मुद्दे किसी गुप्त समझौते का हिस्सा नहीं हो सकते। उनका कहना है कि यदि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति पर आरोप हैं तो उनकी सुनवाई स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में।

