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स्कूल खुल गए, लेकिन शिक्षक नहीं! 5000 भर्ती अधर में,

आत्मानंद स्कूलों की नियुक्तियां भी रुकीं

रायपुर-छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई भी शुरू हो गई है, लेकिन शिक्षकों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार ने सत्र शुरू होने से पहले 5000 शिक्षकों की भर्ती पूरी करने का दावा किया था, लेकिन अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो सकी है। ऐसे में कई स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

आत्मानंद स्कूलों की भर्ती पर भी लगा ब्रेक

राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। रायपुर में ही 150 से अधिक पदों पर भर्ती की तैयारी लगभग पूरी हो गई थी।

लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के आदेश के बाद इन नियुक्तियों को रोक दिया गया। इससे आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों में निराशा है, वहीं स्कूलों में रिक्त पदों का संकट भी बरकरार है।

डीपीआई का नया फैसला बना वजह

डीपीआई ने आत्मानंद स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया को एकरूप और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीकृत भर्ती परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसी कारण जिला स्तर पर चल रही भर्ती प्रक्रियाओं को फिलहाल रोक दिया गया है।

हालांकि इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ गई है। अभ्यर्थी अब यह जानना चाहते हैं कि नई भर्ती परीक्षा कब होगी और नियुक्तियां कब तक पूरी की जाएंगी।

5000 शिक्षकों की भर्ती का इंतजार

स्कूल शिक्षा विभाग ने 5000 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले भर्ती पूरी कर ली जाएगी, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी न रहे।

लेकिन हकीकत यह है कि भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इससे छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है।

सहायक शिक्षक भर्ती भी अटकी

करीब दो महीने पहले सहायक शिक्षक के 2292 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इनमें 795 पद ई-संवर्ग और 1497 पद टी-संवर्ग के शामिल हैं।

विज्ञापन के अनुसार भर्ती परीक्षा संभावित रूप से 11 अक्टूबर को आयोजित की जानी है। ऐसे में यदि परीक्षा तय समय पर होती भी है, तो चयन प्रक्रिया और नियुक्ति पूरी होने में कई महीने लग सकते हैं।

छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर

शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। कई स्कूलों में पहले से ही विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। नए सत्र में भर्ती नहीं होने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

अब सवाल यह है कि जब नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, तो छात्रों को पर्याप्त शिक्षक कब मिलेंगे? और सरकार जिन भर्तियों को समय पर पूरा करने का दावा कर रही थी, वे आखिर कब जमीन पर उतरेंगी? फिलहाल हजारों अभ्यर्थी और लाखों विद्यार्थी इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं।

 

 

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