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शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत का दो टूक जवाब: अभी तय नहीं समयसीमा, कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा फैसला

दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने फिलहाल कोई समयसीमा बताने से इनकार कर दिया है। भारत का कहना है कि बांग्लादेश की ओर से हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध मिला है और उसकी कानूनी जांच की जा रही है।

इस मामले में फैसला तय कानूनी, न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा। ढाका में आयोजित बंगाल की खाड़ी संवाद 2026 के दौरान भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि अभी यह बताना संभव नहीं है कि हसीना की बांग्लादेश वापसी कब होगी। यानी फिलहाल प्रत्यर्पण को लेकर भारत की ओर से कोई निश्चित तारीख या समयसीमा तय नहीं है।

बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी समीक्षा जारी

ढाका में एक निजी थिंक टैंक की ओर से आयोजित चर्चा में भारतीय उच्चायुक्त से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर सवाल किया गया। बांग्लादेश सरकार की ओर से लगातार हसीना को वापस भेजने की मांग की जा रही है। इसके जवाब में भारतीय उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया कि भारत को इस संबंध में औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि अनुरोध की कानूनी समीक्षा चल रही है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्रवाई की जाती है। इसलिए अभी यह कहना संभव नहीं है कि हसीना को बांग्लादेश कब लौटाया जाएगा।

भारत के रुख से यह साफ है कि इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रत्यर्पण के अनुरोध पर अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।

अगस्त 2024 में भारत आई थीं हसीना

शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में पैदा हुए बड़े राजनीतिक संकट के बीच देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय वह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और राजनीतिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी।

हालात गंभीर होने के बाद हसीना अचानक बांग्लादेश से रवाना हुईं और भारत पहुंचीं। भारत की ओर से उस समय कहा गया था कि सीमा पार तेजी से बदल रहे हालात और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें भारत आने की अनुमति देना जरूरी था।

हसीना के भारत आने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। उनकी सरकार सत्ता से बाहर हो गई और बाद में वहां नई राजनीतिक व्यवस्था बनी।

भारत ने मानवीय और स्थिरता का पक्ष रखा

हसीना को भारत में शरण दिए जाने के सवाल पर नई दिल्ली का रुख रहा है कि अगस्त 2024 के दौरान बांग्लादेश में परिस्थितियां बेहद तेजी से बदल रही थीं। ऐसे समय में भारत के सामने सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े कई सवाल थे।

भारत का मानना रहा कि उस समय हसीना को भारत आने की अनुमति देना सीमा पार बढ़ते संकट के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी था। हालांकि अब बांग्लादेश की सरकार हसीना को वापस भेजने की मांग कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों का पहलू भी महत्वपूर्ण है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा, सीमा, व्यापार, जल बंटवारे और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। ऐसे में हसीना का प्रत्यर्पण दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से संवेदनशील विषय बना हुआ है।

नई सरकार लगातार कर रही है वापसी की मांग

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार की ओर से शेख हसीना की वापसी की मांग लगातार उठती रही है। बांग्लादेश की ओर से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आरोपों का हवाला देते हुए भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है।

भारत ने इस अनुरोध को नजरअंदाज करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी समीक्षा शुरू की है। हालांकि भारतीय उच्चायुक्त के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है और फिलहाल किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की गई है।

भारत के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि हसीना लंबे समय तक बांग्लादेश की राजनीति की प्रमुख नेता रही हैं और भारत के साथ उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर संबंध मजबूत हुए थे।

प्रत्यर्पण पर अभी इंतजार करना होगा

शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि भारत ने कोई समयसीमा तय नहीं की है। कानूनी समीक्षा पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। भारत ने संकेत दिया है कि फैसला निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।

ऐसे में बांग्लादेश की मांग के बावजूद हसीना की तत्काल वापसी की संभावना पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। आने वाले समय में कानूनी समीक्षा और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के आधार पर मामले की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल भारत का संदेश स्पष्ट है—प्रत्यर्पण पर फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि तय कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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