RBI गवर्नर ने बताए वैश्विक अर्थव्यवस्था के 4 बड़े खतरे, महंगाई से लेकर AI शेयरों तक चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है। करीब चार साल बाद ब्याज दरों में यह पहली बढ़ोतरी है। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने 4-2 के बहुमत से अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी सोच-समझकर मौद्रिक सख्ती करने का संकेत दिया है। इसी दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चार बड़े जोखिमों को लेकर आगाह किया।
पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की कीमतें
RBI गवर्नर के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऊर्जा की लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी भी वैश्विक महंगाई को प्रभावित कर सकती है।
इन परिस्थितियों के चलते दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों पर मौद्रिक नीति को सख्त करने का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू मजबूती और लचीलापन इन वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।
टैरिफ और व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ा रही चिंता
दूसरा बड़ा जोखिम वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता है। टैरिफ को लेकर लंबे समय से जारी तनाव का असर बाजारों के भरोसे पर पड़ रहा है। व्यापार नीतियों में अचानक बदलाव से कंपनियों की लागत, निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाए जाने की संभावनाओं ने भी व्यापारिक माहौल को चुनौतीपूर्ण बनाया है। ऐसे हालात में भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक व्यापार और निवेश से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तीसरी चुनौती विकसित देशों में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत होता डॉलर है। हाल के समय में कई देशों में सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें बढ़ी हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है और निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
अमेरिकी ट्रेजरी समेत कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की बॉन्ड यील्ड में तेजी से सरकारों की उधारी लागत बढ़ सकती है। ऊंची ब्याज दरें वैश्विक कर्ज और राजकोषीय दबाव को भी बढ़ा सकती हैं।
AI शेयरों में गिरावट का भी खतरा
चौथा बड़ा जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर है। AI कंपनियों में भारी निवेश के कारण उनके शेयरों की कीमतें काफी बढ़ी हैं। ऐसे में यदि बाजार में बड़ा सुधार आता है, तो इसका असर सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
AI क्षेत्र में कंपनियां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए लगातार पूंजी जुटा रही हैं। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर उधारी की लागत बढ़ रही है। ऐसे में AI शेयरों में बड़ी गिरावट निवेशकों के भरोसे और बाजार की स्थिरता के लिए नई चुनौती बन सकती है।
RBI के अनुसार इन सभी जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, व्यापारिक तनाव, ऊंची बॉन्ड यील्ड और वित्तीय बाजारों में संभावित उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।



