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Chhattisgarh

कवर्धा में किसानों का बड़ा आंदोलन, ट्रैक्टर लेकर नेशनल हाईवे पर उतरे किसान; 23 मांगों को लेकर चक्काजाम, स्कूलों में छुट्टी

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में अपनी मांगों को लेकर किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शनस्थल पर पहुंचे और रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की कतारें लगने से आवागमन प्रभावित हो गया है। प्रदर्शन के दौरान केवल एम्बुलेंस को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है। आंदोलन के चलते स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

अधिकारियों से बातचीत बेनतीजा

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रदर्शनस्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के कारण कवर्धा के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर यातायात बाधित होने से आम लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गन्ना बोनस बढ़ाने समेत 23 मांगें

किसानों की प्रमुख मांगों में जिले के दोनों शक्कर कारखानों में गन्ने का उत्पादन बढ़ाना, गन्ना बोनस में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करना, सुतियापाट जलाशय का विस्तार, बिजली बिल कम करना और पिछली सरकार के कार्यकाल के धान बोनस की राशि जारी करना शामिल है। किसानों ने अपनी मांगों की सूची में कुल 23 मुद्दे रखे हैं।

एक सप्ताह का राशन लेकर पहुंचे किसान

आंदोलन को लंबा चलाने की तैयारी के साथ किसान अपने साथ करीब एक सप्ताह का राशन लेकर पहुंचे हैं। प्रदर्शनस्थल के आसपास कुछ किसान सड़क किनारे भोजन बनाते भी नजर आए। इससे संकेत मिलता है कि किसान मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने के इरादे से आए हैं।

पांच प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित

प्रदर्शन के कारण रायपुर-जबलपुर मार्ग सहित कवर्धा-राजनांदगांव और कवर्धा-बिलासपुर मार्ग समेत शहर के प्रमुख रास्तों पर जाम की स्थिति बनी हुई है। यातायात बाधित होने का असर आम नागरिकों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों पर पड़ रहा है।

फिलहाल प्रशासन के सामने किसानों से बातचीत कर समाधान निकालने और यातायात सामान्य कराने की चुनौती है। आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति प्रशासन और किसानों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

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