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रायपुर में 11 सरकारी स्कूल निजी भवनों में संचालित, 2 साल बाद भी जर्जर स्कूल नहीं टूटा; विधायक का पत्र भी बेअसर

रायपुर -छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में 11 सरकारी स्कूल निजी या वैकल्पिक भवनों में संचालित हो रहे हैं। वहीं, गुरुघासीदास नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का जर्जर भवन करीब दो साल बाद भी डिस्मेंटल नहीं किया जा सका है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में विधायक राजेश मूणत द्वारा कलेक्टर को पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। दूसरी ओर, जिले के 134 स्कूलों में 394 से अधिक भवन जर्जर बताए जा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा और नए भवनों के निर्माण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

दो साल से वैकल्पिक भवन में लग रही हैं कक्षाएं

रायपुर के गुरुघासीदास नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन जर्जर होने के कारण यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं दूसरे भवन में संचालित की जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले करीब दो साल से स्कूल का संचालन एक निजी स्कूल के भवन में हो रहा है। हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद भी मूल सरकारी स्कूल भवन को हटाने की कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

इस मामले में विधायक राजेश मूणत ने करीब दो साल पहले रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर जर्जर भवन को 24 घंटे के भीतर डिस्मेंटल कराने और विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की थी। पत्र के कुछ दिनों बाद ही स्कूल के सामने स्थित निजी स्कूल ने विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अपने भवन में जगह उपलब्ध कराने पर सहमति दी थी। इसके बाद से ही कक्षाएं वहां लग रही हैं।

हालांकि, वैकल्पिक भवन मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली, लेकिन पुराने भवन को हटाने और नए भवन के निर्माण की दिशा में कार्रवाई लंबित रहने से मामला अब भी चर्चा में है।

11 सरकारी स्कूल निजी या वैकल्पिक भवनों में संचालित

राजधानी रायपुर में जर्जर भवनों की समस्या के कारण कई सरकारी स्कूलों का संचालन मूल भवन के बजाय दूसरी जगहों पर किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रायपुर में ऐसे 11 स्कूल हैं, जहां पढ़ाई के लिए निजी या वैकल्पिक भवनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

गुरुघासीदास नगर के स्कूल को लेकर एक और सवाल सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, स्कूल संचालन के लिए सालाना करीब 30 हजार रुपये किराया दिए जाने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों से स्कूल की अनुदान राशि का उपयोग किराए के भुगतान में किया जा रहा है। हालांकि, इस भुगतान और व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों की जानकारी स्पष्ट नहीं है।

जिला शिक्षा अधिकारी एमजी सतीश कुमार के मुताबिक, शासन की ओर से जर्जर स्कूलों की जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि रायपुर में कोई भी स्कूल किराए के भवन में संचालित नहीं हो रहा है और स्कूल वैकल्पिक भवनों में चल रहे हैं। ऐसे में स्कूल के संचालन, वैकल्पिक व्यवस्था और भुगतान से संबंधित स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।

रायपुर जिले के 134 स्कूलों में 394 से अधिक भवन जर्जर

जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले के 134 स्कूलों में 394 से अधिक भवन जर्जर स्थिति में हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। कई स्कूलों में आठ से दस तक कक्षों को डिस्मेंटल किए जाने की जरूरत बताई गई है।

इसके बावजूद कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की कक्षाएं जर्जर भवनों में ही संचालित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। जर्जर भवनों की मरम्मत, उन्हें हटाने और नए भवनों के निर्माण में देरी होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्कूल भवनों की खराब स्थिति के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में जर्जर इमारतों से जुड़ी दुर्घटनाओं की खबरें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में स्कूलों की नियमित जांच, जोखिम वाले भवनों को खाली कराना और समय पर जरूरी कार्रवाई करना बेहद महत्वपूर्ण है।

निरीक्षण के बाद भी डिस्मेंटल का काम लंबित

जानकारी के अनुसार, कई स्कूलों के जर्जर भवनों का निरीक्षण किया जा चुका है। भवनों को डिस्मेंटल कराने की जिम्मेदारी नगर निगम के अलग-अलग जोन कार्यालयों को सौंपी गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर काम लंबित होने की बात सामने आई है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब जर्जर भवनों की पहचान हो चुकी है और निरीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, तो उन्हें हटाने में देरी क्यों हो रही है। वहीं, नए भवनों के निर्माण के लिए फंड स्वीकृत होने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने या पुराने भवन को हटाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, संबंधित स्कूल के लिए फंड की स्वीकृति, निर्माण की वर्तमान स्थिति और डिस्मेंटल की कार्रवाई कब तक पूरी होगी, इसे लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्कूल भवनों पर जवाबदेही जरूरी

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। जर्जर भवनों के कारण कक्षाओं को दूसरी जगह संचालित करना तत्काल राहत का उपाय हो सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। पुराने भवनों को समय पर हटाना, नए भवनों का निर्माण करना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

रायपुर में 11 सरकारी स्कूलों के वैकल्पिक भवनों में संचालित होने और जिले के 134 स्कूलों में 394 से अधिक भवनों के जर्जर होने की जानकारी ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन भवनों को लेकर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और विद्यार्थियों को सुरक्षित स्कूल भवन कब तक उपलब्ध हो पाते हैं।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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