शारदीय नवरात्र का पांचवां दिन आज, मां स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख की मान्यता; जानें शुभ मुहूर्त, भोग और मंत्र

दिल्ली। शारदीय नवरात्र (Navratri) के पांचवें दिन गुरुवार को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता ममता, वात्सल्य, प्रेम और संतान सुख की प्रतीक हैं।
उनकी पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। मां का यह स्वरूप भक्तों को शक्ति के साथ करुणा और धैर्य का संदेश देता है।
नवरात्र के इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं और मां को केले सहित विभिन्न फल और मिठाइयों का भोग लगाते हैं। आइए जानते हैं 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, प्रिय भोग, शुभ रंग और मंत्र।
मां स्कंदमाता की पूजा के शुभ मुहूर्त
पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा के लिए ये शुभ समय बताए गए हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- अमृत काल: रात 8:58 बजे से 10:45 बजे तक
भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में पूजा कर सकते हैं। शुभ मुहूर्त की स्थानीय गणना में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।
कैसे करें मां स्कंदमाता की पूजा?
नवरात्र (Navratri) के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर मां स्कंदमाता की तस्वीर अथवा प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले दीपक जलाकर मां का ध्यान करें। इसके बाद रोली, अक्षत, पीले फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। मां को फल, केले, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के दौरान मां स्कंदमाता के मूल मंत्र का जाप करें। भक्त चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
पूजा के बाद मां की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। प्रसाद सभी लोगों में बांटें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से मन को शांति मिलती है।
क्यों कहलाती हैं मां स्कंदमाता?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उन्हें देवताओं की सेना का सेनापति माना जाता है। भगवान स्कंद की माता होने के कारण देवी दुर्गा के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है।
मां स्कंदमाता को मातृत्व, वात्सल्य और शक्ति का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और संतान संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि नवरात्र के पांचवें दिन विशेष रूप से मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा केले से बनी खीर, हलवा और अन्य मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। पूजा में मौसमी फल और सात्विक प्रसाद चढ़ाने की परंपरा भी है।
भोग अर्पित करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। प्रसाद तैयार करते समय सात्विक सामग्री का इस्तेमाल करें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांट दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां को श्रद्धापूर्वक भोग लगाने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
नवरात्र के पांचवें दिन कौन-सा रंग पहनें?
मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग को शुभ माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और मां को पीले फूल अर्पित करना प्रचलित परंपरा है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि, पूजा के लिए किसी खास रंग के कपड़े पहनना अनिवार्य नहीं है। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा कर सकते हैं। पूजा में भाव और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है।
मां स्कंदमाता के मंत्र
मां स्कंदमाता की आराधना के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
1. मूल मंत्र
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
2. बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नमः।
3. प्रार्थना मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
4. स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पूजा के समय मन को शांत रखकर मां का ध्यान करना और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।
ऐसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
धार्मिक चित्रण में मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत मनमोहक बताया गया है। उनकी चार भुजाएं हैं। दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित हैं, जबकि एक हाथ वरद या अभय मुद्रा में रहता है। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। मां का वाहन सिंह है।
कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी (Navratri) भी कहा जाता है। उनका स्वरूप शक्ति, ममता और वात्सल्य का संदेश देता है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करके भक्त उनसे परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यता: मां स्कंदमाता की पूजा नवरात्र की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, मंत्र जाप और आरती के माध्यम से मां की आराधना करते हैं। पूजा की विधि और शुभ समय के लिए स्थानीय पंचांग का भी ध्यान रखना चाहिए।



