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Chhattisgarh

कोरबा में 250 से अधिक शिक्षक पद खाली, स्वामी आत्मानंद स्कूलों में भी भर्ती अटकी; तीन सत्र से जारी संकट

कोरबा-छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में 250 से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी 79 शिक्षकों की भर्ती लंबित है। जिले के करीब 138 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का संकट लगातार बना हुआ है। शैक्षणिक सत्र का आधे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। प्राथमिक स्कूलों से लेकर मिडिल स्कूलों और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों तक में रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिले के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में 250 से अधिक शिक्षक पद खाली हैं। इनमें से फिलहाल 130 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसमें प्राथमिक स्कूलों के 100 और मिडिल स्कूलों के 30 पद शामिल हैं। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और शिक्षकों की पदस्थापना में अभी समय लग सकता है।

25 अक्टूबर को प्रस्तावित है भर्ती परीक्षा

प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है। परीक्षा के बाद परिणाम जारी करने, दस्तावेजों के सत्यापन और चयनित अभ्यर्थियों की पदस्थापना जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इन सभी प्रक्रियाओं के दिसंबर तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।

ऐसे में विद्यार्थियों को नए शिक्षकों के मिलने के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है। भर्ती में देरी का असर उन स्कूलों पर अधिक पड़ रहा है, जहां शिक्षकों की संख्या पहले से ही कम है।

कोरबा जिले में कुल 1,479 प्राथमिक और 524 मिडिल स्कूल संचालित हैं। इनमें से लगभग 138 स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के भरोसे है। ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ अन्य शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालना भी शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्वामी आत्मानंद स्कूलों में 79 पद खाली

कोरबा जिले के 15 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इन स्कूलों में शिक्षकों के 79 पद रिक्त हैं, जिन्हें संविदा के आधार पर भरा जाना है। गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है।

शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थियों को खुद पढ़ाई करने और ऑनलाइन माध्यमों की मदद लेने पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में लंबे समय तक पद खाली रहने से पढ़ाई की नियमितता पर असर पड़ सकता है।

पहले स्वामी आत्मानंद स्कूलों में जिला स्तरीय समिति साक्षात्कार के माध्यम से भर्ती करती थी। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद जिला स्तर पर यह व्यवस्था बंद कर दी गई। अब संचालनालय की ओर से राज्य स्तर पर स्वामी आत्मानंद स्कूलों के लिए कुल 1,812 पदों पर भर्ती की जा रही है। यह प्रक्रिया अभी जारी है। अक्टूबर के अंत तक भर्ती पूरी होने के संकेत मिले हैं, हालांकि नियुक्तियों की अंतिम समय-सीमा स्पष्ट नहीं है।

तीन शैक्षणिक सत्र से बनी हुई है समस्या

कोरबा जिले में शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं है। सरकारी स्कूलों में यह संकट पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से बना हुआ है। लगातार रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी हो रही है। इस समस्या को लेकर छात्र अपनी मांगों के साथ कलेक्टोरेट तक पहुंच चुके हैं। वहीं, पसान में शिक्षकों की कमी के विरोध में चक्काजाम भी किया गया था।

इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। जिला शिक्षा विभाग ने मई में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन शासन स्तर से उस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। अब भर्ती की प्रक्रिया दोबारा आगे बढ़ाई जा रही है।

भर्ती परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और पदस्थापना जैसे चरणों के कारण नियुक्तियों में देरी की आशंका है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने तक विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

स्कूलों से 40 शिक्षक छात्रावासों में संलग्न

एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग के 40 शिक्षकों को छात्रावासों और आश्रमों में संलग्न किया गया है। इनमें कई संस्थान आदिवासी विभाग के अधीन संचालित हैं।

कोरबा जिले में कुल 186 आश्रम और छात्रावास हैं। यहां अधीक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण शिक्षकों को अस्थायी रूप से अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, इन 40 शिक्षकों की मूल नियुक्ति स्कूलों में है।

ऐसे में जब स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है, तब शिक्षकों को दूसरे कार्यों में लगाए जाने से पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छात्रावासों में अधीक्षकों की कमी दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है, ताकि स्कूलों में शिक्षण कार्य भी प्रभावित न हो।

भर्ती में देरी का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी

कोरबा जिले में शिक्षकों के रिक्त पद, एकल शिक्षक वाले स्कूल और स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में भर्ती का इंतजार शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है, जबकि सेजेस में राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रिया जारी है।

अब देखना होगा कि भर्ती की प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं या नहीं और विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक कब तक मिल पाते हैं। फिलहाल, तीन शैक्षणिक सत्रों से जारी शिक्षक संकट के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का मुद्दा बना हुआ है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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