जेल से छूटते ही ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर मुखर हुए CJP नेता: सौरव दास ने लिखा- ‘ज्ञानू मस्ट गो’, ₹50 हजार के बॉन्ड पर मिली रिहाई

दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से बाहर आते ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर मुखर हो गए हैं।
सौरव दास ने करीब नौ दिनों के अंतराल के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- ‘Gyanu has to go’, यानी ज्ञानू को जाना होगा। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी दोनों नेताओं का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे तिरंगा लेकर नारेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं।
दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उसका विरोध खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, फिलहाल आंदोलन की अगली तारीख और स्थान को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दोनों नेताओं को दिल्ली में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से 50-50 हजार रुपए के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड पर रिहाई मिली है।
अभिजीत दीपके ने भी शेयर किया वीडियो
सौरव दास ने बुधवार, 21 अक्टूबर की रात एक्स पर अपनी पहली पोस्ट में ‘Gyanu has to go’ लिखा। इसके बाद CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में दोनों नेता हाथों में तिरंगा लिए भारत माता की जय और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते दिखाई देते हैं।
दीपके ने वीडियो के कैप्शन में ‘Gyanu must go!’ लिखा। पार्टी की इन सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि गिरफ्तारी और जेल में रहने के बावजूद उसका राजनीतिक विरोध जारी है।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए थे नेता
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। इसके बाद पार्टी की ओर से कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम भी रखा गया था।
13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका कुछ कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों नेताओं ने बैरिकेड पार किए और उस क्षेत्र में प्रवेश किया, जहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। उन्होंने तिरंगा दिखाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की।
इसके बाद पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। उन पर पहले दिए गए शांति बनाए रखने के मुचलके की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया गया। अदालत ने शुरुआत में दोनों को पांच दिन की हिरासत में भेजा था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।
दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती, फिर वापस ली याचिका
न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले के खिलाफ दोनों नेताओं ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में कानूनी राहत पाने का दूसरा रास्ता उपलब्ध है। इसके बाद दोनों नेताओं के वकील को पहले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के फैसले का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अदालत में अपील करने की सलाह दी गई।
इसके बाद हाईकोर्ट से याचिका वापस ले ली गई। मामला दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा।
₹50-50 हजार के बॉन्ड पर रिहाई
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट रितु राज ने दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपए के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।
बॉन्ड और जमानतदारों की जांच के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए रिहाई वारंट जारी किया गया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी। दोनों नेताओं को सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित होना होगा।
इसका मतलब है कि रिहाई के बाद भी दोनों नेताओं को मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का दिया आश्वासन
रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने अदालत में लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाला कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहां विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
दोनों नेताओं ने अपने लिखित वचनपत्र में न्यायपालिका और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताया। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि भविष्य में होने वाले उनके विरोध प्रदर्शन संविधान और कानून के दायरे में रहेंगे।
अदालत में दिए गए इस आश्वासन के बाद अब पार्टी को अपनी आगे की रणनीति तय करते समय कानूनी शर्तों का ध्यान रखना होगा।
रिहाई के बाद आगे क्या करेगी CJP?
CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने पहले कहा था कि दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी के सदस्य बैठक करेंगे। इसी बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
फिलहाल पार्टी ने न तो किसी नए प्रदर्शन की तारीख घोषित की है और न ही उसके स्थान की जानकारी दी है। सौरव दास की सोशल मीडिया पोस्ट और अभिजीत दीपके के वीडियो से पार्टी का विरोध जारी रखने का संकेत जरूर मिला है।
अब देखना होगा कि अदालत में दिए गए आश्वासन और चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी राजनीतिक मुहिम को किस रूप में आगे बढ़ाती है।



