जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ी राहत! लोकसभा में नहीं आएगा महाभियोग प्रस्ताव, पेंशन और रिटायरमेंट लाभ मिलते रहने की संभावना

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। उनके इस्तीफे के बाद अब लोकसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया को बंद किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, संसद के आगामी सत्र में इस मामले को औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की जा सकती है।
दरअसल, मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग बुझाने के दौरान जले और अधजले नोट मिलने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इस मामले में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच समिति ने रिपोर्ट में क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की थी। समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया। रिपोर्ट में नकदी के स्रोत और उससे जुड़े सवालों पर उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक बताया गया था। साथ ही, सबूतों को सुरक्षित रखने में चूक का भी उल्लेख किया गया था।
महाभियोग प्रक्रिया बंद होने से क्या होगा?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बाद उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया जारी रखने की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है। ऐसे में उन्हें पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मिलते रहने की संभावना है। हालांकि, इन लाभों की पात्रता संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी।
FIR दर्ज नहीं होने पर भी उठ रहे सवाल
इस मामले में जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और जांच की मांग भी उठी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था और सितंबर 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर राहत नहीं दी थी।
फिलहाल, महाभियोग की प्रक्रिया बंद होने की संभावना के बीच इस मामले में आपराधिक कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर सवाल बने हुए हैं।



