सुकमा में बदलेगा मौसम! बादल, हल्की बारिश और ठंडी हवाओं के आसार, किसानों को अलर्ट

सुकमा : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में आगामी दिनों में मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 20 से 24 अक्टूबर तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान हल्की बारिश, गरज-चमक और बिजली कड़कने की आशंका को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम में संभावित बदलाव का असर खेती-किसानी के कामों पर भी पड़ सकता है।
सुकमा में कैसा रहेगा मौसम?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, जगदलपुर के पूर्वानुमान के मुताबिक, सुकमा जिले में इन दिनों आसमान में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हो सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और कृषि कार्यों की योजना उसी के अनुसार बनाने की सलाह दी गई है।
पूर्वानुमान के अनुसार, जिले में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। वहीं, उत्तर-पूर्व दिशा से लगभग 4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है।
हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना के बीच किसानों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम की ताजा जानकारी के लिए किसान ‘मौसम सीजी’ और ‘मेघदूत’ ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह
मौसम में बदलाव की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पकी हुई फसलों की कटाई जल्द पूरी करने और उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी है। बारिश होने की स्थिति में खेतों में तैयार फसलों और कटाई के बाद रखी उपज को नुकसान पहुंच सकता है।
पकी हुई उड़द, कुल्थी, मूंगफली और लघु धान्य फसलों की कटाई या खुदाई जल्द पूरी कर लेनी चाहिए। कटाई के बाद उपज को ऐसी जगह रखें, जहां बारिश का पानी न पहुंचे। इससे फसल की गुणवत्ता बनाए रखने और नुकसान की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
धान की फसल में बाली निकलने और दाना भरने की अवस्था के दौरान नमी की कमी नहीं होने देना भी जरूरी है। किसानों को खेतों की स्थिति देखकर सिंचाई का निर्णय लेना चाहिए, ताकि फसल को जरूरत के अनुसार पानी मिल सके।
कीटों की निगरानी करें किसान
कृषि विशेषज्ञों ने धान की फसल में हरा माहू, तना छेदक और पैनिकल माइट जैसे कीटों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। यदि फसल में कीटों के लक्षण दिखाई दें, तो कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं।
बारिश या गरज-चमक की संभावना के दौरान कीटनाशक और खरपतवारनाशक रसायनों का छिड़काव करने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम अनुकूल होने पर ही कृषि रसायनों का इस्तेमाल करें और उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
मक्का की फसल में निराई-गुड़ाई के साथ मिट्टी चढ़ाने का काम समय पर पूरा करें। दूधिया अवस्था में फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई सुनिश्चित करें। वहीं, अरहर की फसल में संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आवश्यकतानुसार सिंचाई पर ध्यान देना चाहिए।
सब्जियों और आम के बागों की भी करें देखभाल
मौसम में बदलाव का असर सब्जियों और बागवानी फसलों पर भी पड़ सकता है। किसानों को टमाटर, बैंगन, मिर्च और गोभीवर्गीय सब्जियों की नर्सरी समय पर तैयार करने की सलाह दी गई है। नर्सरी को जलभराव से बचाने के लिए उचित निकासी की व्यवस्था रखें।
आम के बागों में मिली बग की निगरानी करें और प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाएं। बारिश की स्थिति में खेतों और बागों में पानी जमा होने से रोकना भी जरूरी है।
पशुपालक भी बरतें सावधानी
कृषि मौसम सलाह में पशुओं की देखभाल पर भी जोर दिया गया है। पशुपालकों को दूध निकालने से पहले और बाद में पशुओं के थनों की सफाई करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पशुओं को उचित मात्रा में लवण-मिश्रण देने और गलघोंटू व लंगड़ा बुखार जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराने पर ध्यान देना चाहिए।
मौसम की जानकारी लेकर ही बनाएं कृषि योजना
सुकमा जिले में संभावित बादल और हल्की बारिश को देखते हुए किसानों के लिए जरूरी है कि वे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कटाई, सिंचाई और फसल सुरक्षा से जुड़े काम करें। पकी फसलों को समय पर काटना, उपज को सुरक्षित रखना और कीटों की निगरानी करना नुकसान से बचने में मददगार हो सकता है।



