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BTI ग्राउंड पर नहीं बनेगा कॉम्प्लेक्स! विधायक पुरंदर मिश्रा ने दूर किया विवाद,

जानिए क्या है पूरा मामला

 रायपुर : राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीटीआई ग्राउंड की जमीन पर कोई कमर्शियल या रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स नहीं बनाया जाएगा। विधायक के मुताबिक, प्रस्तावित निर्माण ग्राउंड से लगे पुराने और जर्जर सरकारी आवासों की जगह पर किया जाना है। इससे बीटीआई ग्राउंड में निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों पर नई स्पष्टता सामने आई है।

बीटीआई ग्राउंड पर निर्माण को लेकर क्या बोले विधायक पुरंदर मिश्रा?

रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बयानबाजी और चर्चाएं तेज थीं। इसी बीच रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि बीटीआई ग्राउंड के भीतर किसी भी तरह का व्यावसायिक या आवासीय कॉम्प्लेक्स नहीं बनाया जाएगा।

विधायक के बयान के अनुसार, जिस निर्माण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह ग्राउंड की जमीन पर प्रस्तावित नहीं है। निर्माण की योजना बीटीआई ग्राउंड के पास मौजूद सरकारी कर्मचारियों के पुराने और जर्जर मकानों की जगह पर है। ऐसे में ग्राउंड और उससे लगे सरकारी आवासों की जमीन को अलग-अलग समझना जरूरी है।

बीटीआई ग्राउंड रायपुर के इस इलाके में खेल गतिविधियों और सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए यहां निर्माण की चर्चाओं के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि क्या ग्राउंड की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होंगी। विधायक के बयान ने इस आशंका को दूर करने की कोशिश की है।

पुराने सरकारी मकानों की जगह पर होगा प्रस्तावित निर्माण

विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि प्रस्तावित निर्माण बीटीआई ग्राउंड की जमीन पर नहीं, बल्कि उसके आसपास मौजूद पुराने सरकारी आवासों के स्थान पर किया जाना है। ये मकान लंबे समय से उपयोग में रहे हैं और अब जर्जर स्थिति में होने की बात कही गई है।

पुराने सरकारी आवासों के पुनर्विकास का मुद्दा और खेल मैदान की जमीन पर निर्माण का सवाल अलग-अलग हैं। विधायक की सफाई इसी अंतर को स्पष्ट करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। उनके अनुसार, बीटीआई ग्राउंड को सुरक्षित रखा जाएगा और प्रस्तावित निर्माण को ग्राउंड के भीतर का प्रोजेक्ट नहीं समझा जाना चाहिए।

हालांकि, प्रस्तावित निर्माण की वास्तविक सीमा, डिजाइन और जमीन से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक योजना और दस्तावेजों को देखना महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण किस क्षेत्र में और किन शर्तों के तहत किया जाना है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उठाया था मुद्दा

बीटीआई ग्राउंड को लेकर विवाद उस समय और चर्चा में आ गया, जब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजधानी रायपुर की व्यवस्था और ट्रैफिक की समस्या पर सरकार को घेरा था।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया था कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था के नाम पर आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों के पास एक से अधिक सरकारी बंगले होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि ऐसे आवासों को खाली कराया जाना चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने बीटीआई ग्राउंड में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की चर्चा पर भी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस तरह के निर्माण से आम जनता को परेशानी हो सकती है। इस बयान के बाद बीटीआई ग्राउंड की जमीन और प्रस्तावित निर्माण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई थी।

ट्रैफिक और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर क्यों उठे सवाल?

रायपुर तेजी से विकसित हो रही राजधानी है। शहर के कई इलाकों में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और निर्माण गतिविधियों के कारण ट्रैफिक का दबाव लगातार चर्चा में रहता है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों, खेल मैदानों और सरकारी जमीन के उपयोग को लेकर होने वाले फैसलों पर लोगों की नजर रहती है।

बीटीआई ग्राउंड जैसे स्थानों के संबंध में किसी भी निर्माण योजना की जानकारी सामने आने पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इससे आम नागरिकों, खिलाड़ियों और आसपास रहने वाले लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि निर्माण सरकारी आवासों की जगह पर होना है, तो भी उसके आकार, पार्किंग, यातायात और आसपास की सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए इस मामले में केवल राजनीतिक बयानों के बजाय आधिकारिक योजना, जमीन की सीमा और निर्माण के उद्देश्य से जुड़ी जानकारी भी अहम रहेगी।

विधायक के बयान के बाद क्या स्थिति साफ हुई?

विधायक पुरंदर मिश्रा के बयान से फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि बीटीआई ग्राउंड के भीतर किसी कमर्शियल या रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण प्रस्तावित नहीं है। उनके अनुसार, निर्माण ग्राउंड से लगे पुराने सरकारी आवासों की जगह पर किया जाना है।

इस सफाई के बाद विवाद का मुख्य सवाल ग्राउंड की जमीन और आसपास के सरकारी आवासों के बीच अंतर पर केंद्रित हो गया है। आगे इस परियोजना को लेकर संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर निर्माण की सीमा और स्वरूप को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल विधायक का बयान बीटीआई ग्राउंड को सुरक्षित रखने के आश्वासन के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष की आपत्तियों और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों के बीच सरकारी योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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