बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति की मौजूदगी और माओवाद से मुक्ति पर CM साय ने जताई खुशी, बोले- बस्तर में तेजी से पहुंच रहा विकास

जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने इस साल के आयोजन को लेकर दो बड़ी खुशियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति की सहभागिता और बस्तर का माओवाद से मुक्त होना प्रदेश के लिए गौरव और खुशी की बात है।
लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल रमेन डेका का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को बस्तर दशहरा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, जिसे स्वीकार कर उन्होंने अपनी उपस्थिति से आयोजन का उत्साह बढ़ाया है।
75 दिनों तक चलने वाला अनूठा आयोजन
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और रस्मों के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्सव करीब 75 दिनों तक चलता है और इसमें कई पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रपति का आगमन और बस्तर को माओवाद से मुक्ति मिलना दो ऐसी वजहें हैं, जिनसे क्षेत्र के लोग विशेष रूप से खुश हैं।
बस्तर की संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बस्तर पंडुम’ के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, ‘बस्तर मुन्ने’ और ‘नियद नेल्लानार’ जैसी पहलों के जरिए क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण से दूरस्थ इलाकों को जोड़ा जा रहा है। इन मार्गों पर मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा भी संचालित हो रही है, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा मिल रही है।
रेल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि रायपुर से रावघाट रेल लाइन शुरू हो चुकी है, जबकि रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन का काम जारी है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से बस्तर के विकास को गति मिलेगी और लोगों को नए अवसर मिलेंगे।
स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है।
वनोपज का उचित मूल्य दिलाने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वन उपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि संस्कृति के संरक्षण, सड़क और रेल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के अवसरों के विस्तार से बस्तर में विकास की गति और तेज होगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।



