Silver Price Crash: ₹4.10 लाख से ₹2 लाख पर आई चांदी, रायपुर के सराफा बाजार में बढ़ी हलचल; ₹1,000 करोड़ के नुकसान का दावा

रायपुर। चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों और सराफा कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी 2026 में वायदा बाजार में चांदी का भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अब अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में कीमत घटकर करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो रह जाने का दावा किया जा रहा है। तेजी के दौरान ऊंचे भाव पर निवेश करने वाले लोगों और कारोबारियों को इस गिरावट से बड़ा नुकसान होने की आशंका है। रायपुर के सराफा बाजार में भी इसे लेकर हलचल तेज है। खबर में बाजार से जुड़े लोगों के हवाले से निवेशकों और कारोबारियों को करीब 1,000 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान जताया गया है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी चांदी
चांदी की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। उपलब्ध कराए गए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2025 को चांदी का भाव करीब 1 लाख 57 हजार रुपये प्रति किलो था। इसके बाद कीमतों में तेजी आई और 28 जनवरी 2026 को वायदा बाजार में चांदी करीब 4 लाख 10 हजार रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई।
इस तेजी के दौरान कई निवेशकों को उम्मीद थी कि आने वाले समय में चांदी के भाव और ऊपर जा सकते हैं। इसी उम्मीद में कुछ लोगों ने ऊंची कीमतों पर निवेश किया। लेकिन इसके बाद बाजार की दिशा बदल गई और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई। अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में चांदी का भाव करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो तक आने का दावा किया गया है।
अगर इन दोनों स्तरों की तुलना करें, तो 4.10 लाख रुपये से 2 लाख रुपये प्रति किलो तक की गिरावट करीब 51 प्रतिशत बैठती है। यानी रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले चांदी की कीमत लगभग आधी रह गई है। हालांकि, वायदा बाजार का भाव और स्थानीय सराफा बाजार में वास्तविक खरीद-बिक्री का भाव अलग हो सकता है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी या बिक्री से पहले उसी दिन का ताजा स्थानीय भाव जरूर जांचना चाहिए।
सोने की कीमतों में भी गिरावट का दावा
चांदी के साथ सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब 1 लाख 86 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से घटकर लगभग 1 लाख 46 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक आने का दावा किया गया है।
सोना और चांदी दोनों ही भारतीय परिवारों के लिए बचत और निवेश के महत्वपूर्ण विकल्प माने जाते हैं। ऐसे में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर उन लोगों पर भी पड़ता है, जो आभूषण खरीदने, शादी-ब्याह की तैयारी करने या लंबे समय के लिए कीमती धातुओं में निवेश करने की योजना बनाते हैं।
हालांकि, सोने और चांदी के भाव की तुलना करते समय तारीख, शुद्धता, बाजार, टैक्स और अन्य शुल्कों को ध्यान में रखना जरूरी है। वायदा बाजार के आंकड़ों को सीधे स्थानीय खुदरा कीमतों के बराबर नहीं माना जा सकता।
आम ग्राहकों और छोटे निवेशकों पर बढ़ा दबाव
कीमतों में अचानक आई गिरावट ने उन निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने तेजी के दौरान चांदी खरीदी थी। यदि किसी व्यक्ति ने ऊंचे भाव पर चांदी खरीदी और उसे कम कीमत पर बेचना पड़े, तो उसे वास्तविक नुकसान हो सकता है। वहीं, जिन लोगों ने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है, उनके लिए यह गिरावट फिलहाल निवेश के मूल्य में कमी के रूप में दिखाई दे सकती है।
कुछ कारोबारियों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खबर में दावा किया गया है कि कुछ लोगों ने कर्ज लेकर या ब्याज पर पैसा उठाकर बाजार में निवेश किया था। कीमतें गिरने के बाद ऐसे निवेशकों के सामने मूलधन और ब्याज चुकाने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, चांदी के भाव में गिरावट से हर खरीदार को नुकसान हुआ हो, ऐसा जरूरी नहीं है। नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश कब और किस कीमत पर किया गया, चांदी किस रूप में खरीदी गई और उसे कब बेचा गया। इसी तरह, आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और वायदा बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों का जोखिम भी अलग-अलग होता है।
रायपुर के सराफा बाजार में चिंता
रायपुर में सराफा कारोबार का बड़ा नेटवर्क है। खबर के मुताबिक, शहर में लगभग 3,000 सराफा कारोबारी हैं। कीमतों में तेज बदलाव से बाजार में अनिश्चितता बढ़ने की चिंता जताई जा रही है। कारोबारियों के लिए ऐसे हालात में स्टॉक का मूल्य, ग्राहकों की खरीदारी और बाजार में नकदी का प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
सराफा व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव का असर वास्तविक व्यापार पर भी पड़ सकता है। जब ग्राहक भविष्य में कीमतें घटने की उम्मीद करते हैं, तो वे खरीदारी टाल सकते हैं। वहीं, ऊंचे भाव पर स्टॉक रखने वाले कारोबारियों को कीमत गिरने पर अपने माल के मूल्य में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बावजूद, बाजार में सभी कारोबारियों की स्थिति एक जैसी नहीं होती। जिन व्यापारियों का कारोबार वास्तविक आभूषण बिक्री और सामान्य मांग पर आधारित है, उन पर असर उनके स्टॉक, खरीद मूल्य और बिक्री की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की मांग
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू ने वायदा कारोबार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि सोने-चांदी के वायदा बाजार में सट्टेबाजी जैसी प्रवृत्तियों के कारण छोटे कारोबारी और निवेशक जोखिम में पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक, कीमतों में कृत्रिम उतार-चढ़ाव की आशंका से आम लोगों की बचत प्रभावित होती है।
यह उनकी ओर से व्यक्त की गई राय और मांग है। वायदा बाजार के पक्ष में यह तर्क भी दिया जाता है कि यह कारोबार कीमतों से जुड़े जोखिम को प्रबंधित करने और भविष्य के भावों के आधार पर कारोबारी निर्णय लेने का माध्यम हो सकता है। हालांकि, इसमें तेजी से कीमत बदलने, मार्जिन की जरूरत और नुकसान बढ़ने का जोखिम भी रहता है। इसलिए बिना पर्याप्त जानकारी के वायदा कारोबार करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
भारत में सोने-चांदी का वायदा कारोबार कितना वैध है?
भारत में सोने-चांदी सहित कमोडिटी डेरिवेटिव्स का कारोबार निर्धारित कानूनी और नियामकीय ढांचे के तहत अधिकृत एक्सचेंजों पर किया जाता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार का नियमन करता है। इसलिए वायदा कारोबार को पूरी तरह अवैध या अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि कहना सही नहीं होगा।
हालांकि, वैधानिक होने का अर्थ यह नहीं है कि इसमें जोखिम नहीं है। वायदा सौदों में कीमतों का उतार-चढ़ाव, मार्जिन कॉल और लीवरेज के कारण नुकसान तेजी से बढ़ सकता है। निवेशकों को कारोबार की शर्तों, जोखिम और अपनी वित्तीय क्षमता को समझकर ही निर्णय लेना चाहिए।
आगे क्या रहेगा चांदी की कीमतों का रुख?
फिलहाल निवेशकों और कारोबारियों की नजर चांदी की कीमतों में स्थिरता लौटने पर है। लेकिन केवल पिछली तेजी या गिरावट के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि भाव आगे बढ़ेंगे या और नीचे जाएंगे। वैश्विक मांग, औद्योगिक उपयोग, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीदें और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में आम ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेनी चाहिए, जबकि निवेशकों को केवल तेजी की उम्मीद में कर्ज लेकर निवेश करने से बचना चाहिए। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट एक बार फिर बताती है कि कीमती धातुओं का बाजार भी जोखिम से मुक्त नहीं है।



