करवा चौथ पर रायपुर में रात 8:18 बजे चंद्रोदय का अनुमान, बादल बने सकते हैं दर्शन में बाधा; जानें क्या करें महिलाएं

करवा चौथ का पर्व आज 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। दिनभर निर्जला उपवास करने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद व्रत खोला जाता है। छत्तीसगढ़ में रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने का अनुमान है। हालांकि, चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से कई इलाकों में बादल छाए रहने की संभावना है, जिससे चंद्रमा के दर्शन में देरी हो सकती है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का अनुमानित समय
चंद्रोदय के अनुमानित समय के अनुसार, बलरामपुर में रात 8:02 बजे, अंबिकापुर में 8:03 बजे और कोरबा में 8:06 बजे चांद दिखाई देने की संभावना है। रायपुर में रात 8:18 बजे चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं, जबकि जगदलपुर में रात 8:17 से 8:22 बजे के बीच चांद निकलने का अनुमान है।
बादल छाए रहने की स्थिति में चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आने के बाद भी दिखाई नहीं दे सकता। ऊंची इमारतों, पहाड़ियों और स्थानीय मौसम के कारण भी दर्शन में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है।
चांद दिखाई न दे तो क्या करें?
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, यदि बादलों के कारण चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पाते हैं, तो महिलाएं भगवान शिव और गणेश जी के मंदिर जाकर मानसिक रूप से चंद्रदेव का स्मरण कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की जटाओं में चंद्रदेव विराजमान हैं। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है।
करवा चौथ पर शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और चंद्रमा निकलने पर छलनी से चांद तथा पति के दर्शन करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलने की परंपरा है।
चतुर्थी तिथि रात 10:11 बजे तक
ज्योतिषाचार्य रितेश शास्त्री के अनुसार, चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की रात 1:08 बजे शुरू हुई थी और 29 अक्टूबर की रात 10:11 बजे तक रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार शुक्रादित्य और बुधादित्य योग भी बन रहे हैं। शुक्र को प्रेम और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है, जबकि सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनता है।
इन योगों को ज्योतिष में शुभ माना जाता है। करवा चौथ पर महिलाएं पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।
सरगी से शुरू होता है व्रत, खानपान का रखें ध्यान
करवा चौथ पर महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, मेवे और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर बिना भोजन और पानी के व्रत रखती हैं।
लंबे समय तक निर्जला उपवास रखने से कुछ महिलाओं को कमजोरी, थकान या चक्कर आने की परेशानी हो सकती है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना और पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है। किसी बीमारी से पीड़ित या नियमित दवाएं लेने वाली महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। व्रत खोलने के बाद भी धीरे-धीरे पानी पीना और हल्का भोजन करना बेहतर रहता है।
पूजा में करवे का विशेष महत्व
करवा चौथ की पूजा में करवे का खास महत्व है। इसमें पानी भरकर रखा जाता है और इसी जल से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। परंपरा के अनुसार, करवे में साबुत चावल, सिक्का और फूल भी रखे जाते हैं। पूजा में रोली का इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि सामग्री स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
करवा चौथ से जुड़ी धार्मिक कथाओं में सावित्री-सत्यवान और द्रौपदी की कथाओं का भी उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के माध्यम से पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का महत्व बताया जाता है।



