छत्तीसगढ़ में ई-बसों पर डिपो का ब्रेक, 240 बसें अब तक सड़कों पर नहीं उतरीं; रायपुर में सबसे धीमा निर्माण

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए स्वीकृत 240 इलेक्ट्रिक बसों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में बसें चलाई जानी हैं, लेकिन डिपो और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण अब तक किसी भी शहर में इनका संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
योजना के तहत दिसंबर 2025 तक बसें सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी जरूरी अधोसंरचना का काम अधूरा है। इसका असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और कारोबारियों पर पड़ रहा है। फिलहाल यात्रियों को ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
चार शहरों में चलेंगी 240 ई-बसें
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत प्रदेश के चार शहरों के लिए कुल 240 बसें स्वीकृत की गई हैं। इनमें रायपुर को 100, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिली हैं। इनके संचालन के लिए संबंधित शहरों में डिपो और चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं।
योजना का उद्देश्य शहरों में सस्ता, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों से प्रदूषण कम करने के साथ यात्रियों को बेहतर आवागमन सुविधा देने की तैयारी है, लेकिन फिलहाल डिपो निर्माण की धीमी गति सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
रायपुर में सबसे धीमा निर्माण, जरवाय डिपो का 40% काम पूरा
चारों शहरों में रायपुर के जरवाय स्थित डिपो का निर्माण सबसे पीछे है। यहां अब तक केवल 40 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है। करीब दो हेक्टेयर जमीन पर 100 ई-बसों के संचालन के लिए डिपो और चार्जिंग स्टेशन तैयार किया जा रहा है।
सुडा के अनुसार, इस डिपो के निर्माण की संभावित पूर्णता तिथि 31 दिसंबर 2026 तय की गई थी। हालांकि, सीईओ ने अब इसे अगले वर्ष जनवरी के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य बताया है। रायपुर में मार्च 2024 में 100 पीएम ई-बसों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन निर्माण में देरी के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका।
दुर्ग-भिलाई में नवंबर से संचालन की तैयारी
डिपो निर्माण के मामले में दुर्ग-भिलाई सबसे आगे है। कदंबरी नगर में डिपो का सिविल निर्माण करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, यहां नवंबर में ई-बसों का संचालन शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, बिलासपुर के कोनी और कोरबा के दर्री में डिपो का करीब 80-80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। विभागीय योजना के अनुसार, कोरबा में नवंबर के बाद और बिलासपुर में दिसंबर से बसें चलाने की तैयारी है।
शहरवार ई-बसों और डिपो की स्थिति
शहर| स्वीकृत बसें| डिपो निर्माण| संचालन की तैयारी
रायपुर| 100| 40%| जनवरी 2027 के अंत तक डिपो पूरा करने का लक्ष्य
दुर्ग-भिलाई| 50| 90%| नवंबर 2026 में संचालन का प्रयास
बिलासपुर| 50| 80%| दिसंबर 2026 से संचालन की योजना
कोरबा| 40| 80%| नवंबर के बाद संचालन की तैयारी
ये समयसीमाएं विभागीय योजना और अधिकारियों के बताए लक्ष्यों पर आधारित हैं। वास्तविक संचालन डिपो, चार्जिंग स्टेशन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही शुरू हो सकेगा।
कोरोना के बाद सिटी बस सेवा भी नहीं संभली
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। कोरोना काल से पहले छत्तीसगढ़ के नौ शहरों में 378 सिटी बसें संचालित होती थीं। महामारी के दौरान बसों का संचालन लंबे समय तक बंद रहा। इसके बाद रखरखाव और अन्य कारणों से 272 बसें कबाड़ हो गईं।
अब केवल 106 बसें बची हैं, जिनमें से रोजाना करीब 70 से 80 बसें ही सड़कों पर उतर पाती हैं। दुर्ग-भिलाई और जगदलपुर में फिलहाल एक भी सिटी बस संचालित नहीं हो रही है। ऐसे में नई ई-बसों के संचालन में देरी से सार्वजनिक परिवहन की समस्या और बढ़ गई है।
अधिकारी बोले- चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा संचालन
राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा) के सीईओ सुमित अग्रवाल के अनुसार, दुर्ग-भिलाई में डिपो का 90 प्रतिशत सिविल निर्माण पूरा हो चुका है। यहां नवंबर में ई-बसें चलाने का प्रयास किया जा रहा है। बिलासपुर और कोरबा में दिसंबर से संचालन की योजना है।
उन्होंने बताया कि रायपुर के जरवाय में डिपो निर्माण तेजी से कराया जा रहा है और इसे अगले वर्ष जनवरी के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।
फिलहाल चारों शहरों के यात्रियों को ई-बसों के संचालन का इंतजार है। 240 बसों की स्वीकृति के बावजूद उनका लाभ तभी मिल सकेगा, जब डिपो और चार्जिंग स्टेशन सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होंगी।



