नवा रायपुर में देश के पहले पीपल वन की शुरुआत, 16 एकड़ में लगाए गए 2,500 से अधिक पौधे
5 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। राज्योत्सव 2026 के ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सेक्टर-16 स्थित ‘विकसित भारत संकल्प पार्क’ यानी ‘पीपल वन’ का लोकार्पण किया। इस पहल का उद्देश्य नवा रायपुर को देश की पहली पीपल सिटी के रूप में विकसित करना है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरित इस परियोजना के जरिए शहरी विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
करीब 16 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस पार्क में एक ही दिन में 2,500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा स्थानीय जलवायु के अनुकूल 500 से अधिक अन्य औषधीय और छायादार प्रजातियों के पौधे भी लगाए गए हैं। सरकार का मानना है कि यह हरित परियोजना आने वाले समय में नवा रायपुर की पर्यावरणीय पहचान को मजबूत करेगी।
16 एकड़ में विकसित होगा पीपल वन
नवा रायपुर के सेक्टर-16 में लगभग 6.4 हेक्टेयर यानी 16 एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित भारत संकल्प पार्क तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना को शहरी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पार्क की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि यहां लगाए गए पौधों को पर्याप्त जगह और अनुकूल वातावरण मिल सके। लोकार्पण से पहले वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने भी पार्क स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों और विकास कार्यों का जायजा लिया था।
एक साथ लगाए गए 2,500 से अधिक पीपल के पौधे
पीपल वन की सबसे खास बात यहां बड़े पैमाने पर किया गया पौधरोपण है। पार्क के उद्घाटन के अवसर पर 2,500 से अधिक पीपल के पौधे लगाए गए। इनके साथ छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुकूल 500 से अधिक अन्य स्थानीय, औषधीय और छायादार प्रजातियों को भी शामिल किया गया है।
वन विभाग की देखरेख में पौधों का रोपण किया गया है। इन पौधों के विकसित होने के बाद यह क्षेत्र घने हरित क्षेत्र के रूप में तैयार होगा, जिससे आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
नवा रायपुर में 5 लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस परियोजना को केवल एक पार्क तक सीमित नहीं रखने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में पूरे नवा रायपुर क्षेत्र में कुल 5 लाख पीपल के पेड़ लगाने की योजना है।
इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए नगर निगम और वन विकास निगम मिलकर काम करेंगे। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो नवा रायपुर देश के प्रमुख हरित और पर्यावरण अनुकूल नियोजित शहरों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
‘पीपल फॉर पीपल’ अभियान से जुड़ेगी जनता
पीपल वन को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए सरकार ने ‘पीपल फॉर पीपल’ अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्कूली बच्चों को पौधों की देखभाल के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इस अभियान के अंतर्गत लोग पौधों को गोद लेकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी उठा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी अभियान न रहकर जन आंदोलन बने और अधिक से अधिक लोग इसमें अपनी भागीदारी निभाएं।
पर्यावरण के लिए क्यों खास है पीपल का पेड़?
पीपल का पेड़ भारतीय संस्कृति में धार्मिक और पारंपरिक महत्व रखता है। इसके अलावा यह एक विशाल छायादार वृक्ष है, जो शहरी वातावरण में हरियाली बढ़ाने, धूल के कणों को रोकने और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में योगदान देता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पेड़ शहरी क्षेत्रों में तापमान नियंत्रित करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और पक्षियों समेत कई जीवों को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पीपल के पेड़ों का बड़े स्तर पर रोपण नवा रायपुर के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
स्मार्ट सिटी के बीच पर्यावरण संरक्षण की नई पहल
नवा रायपुर को आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से युक्त स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां चौड़ी सड़कें, बड़ी इमारतें और व्यावसायिक केंद्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे में शहरी विकास के साथ हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
पीपल वन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आने वाले समय में यह पार्क शहर के लोगों के लिए हरित स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और शहरी वानिकी से जुड़े अध्ययन के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पर्यावरणीय पहचान
नवा रायपुर में पीपल वन की शुरुआत को राज्य के पर्यावरण संरक्षण अभियान की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। 5 लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य पूरा होने पर शहर की हरित पहचान और मजबूत होगी।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच इस तरह की परियोजनाएं शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं। अब इस परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लगाए गए पौधों का संरक्षण और देखभाल किस तरह सुनिश्चित की जाती है।



