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कमल हासन 72 साल के हुए: गोडसे से लेकर एलन मस्क तक, अपने बयानों से कई बार विवादों में घिरे

दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सबसे प्रयोगधर्मी और मंझे हुए अभिनेताओं में शामिल कमल हासन (Kamal Haasan) 7 नवंबर को 72 साल के हो गए हैं। करीब छह दशक के फिल्मी करियर में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन, लेखन और फिल्म निर्माण में भी अपनी अलग पहचान बनाई। पर्दे पर किरदार को वास्तविक बनाने के लिए उनकी परफेक्शन की जिद इतनी मशहूर है कि कई फिल्ममेकर्स के साथ इस बात को लेकर मतभेद भी हुए कि उनके प्रयोगों से फिल्मों का बजट बढ़ जाता है। लेकिन यही जुनून उनकी पहचान भी बना।

कमल हासन की सात फिल्मों को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेजा जा चुका है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन फिल्मों को ऑस्कर के लिए नामांकन मिला था। उन्हें अभिनय के लिए कई बड़े पुरस्कार मिले हैं। पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से भी उन्हें नवाजा गया है।

लेकिन फिल्मों में अपनी उपलब्धियों के साथ कमल हासन अपनी बेबाकी के लिए भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने धर्म, भाषा, राजनीति और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। कई बार उनके बयान विवादों का कारण बने। नाथूराम गोडसे को लेकर टिप्पणी हो या कन्नड़ भाषा पर दिया गया बयान, हर बार उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।

आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके करियर और उन बड़े विवादों की कहानी, जिन्होंने उन्हें सुर्खियों में रखा।

1. ‘ठग लाइफ’ के ऑडियो लॉन्च में कन्नड़ भाषा पर टिप्पणी

 

कमल हासन (Kamal Haasan) का सबसे चर्चित विवाद 2025 में फिल्म ‘ठग लाइफ’ के ऑडियो लॉन्च के दौरान हुआ। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी भाषा कन्नड़ भी तमिल से पैदा हुई है। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत ‘उइरे उरावे तमीज’ यानी तमिल मेरे जीवन और रिश्तों का हिस्सा है, कहकर की थी।

उनकी इस टिप्पणी पर कर्नाटक में विरोध शुरू हो गया। कन्नड़ समर्थक संगठनों और भाजपा नेताओं ने इसे कन्नड़ भाषा और उसके इतिहास का अपमान बताया। कई जगह फिल्म के पोस्टर फाड़े गए और सार्वजनिक माफी की मांग उठी। कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी फिल्म की रिलीज का विरोध किया।

3 जून 2025 को कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कमल हासन को टिप्पणी पर खेद जताने और विवाद खत्म करने की सलाह दी। कमल ने माफी मांगने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी बात का उद्देश्य भाषाई एकता और अपनापन जताना था।

बाद में फिल्म की कर्नाटक में रिलीज को लेकर कानूनी विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज रोकने के विरोध में सुनवाई की और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया।

2. गोडसे को बताया आजाद भारत का पहला आतंकवादी

2019 में कमल हासन ने अपनी राजनीतिक पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (MNM) बनाई थी। इसी साल तमिलनाडु की अरवाकुरिची विधानसभा सीट पर उपचुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने नाथूराम गोडसे को लेकर बयान दिया।

उन्होंने कहा था कि आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था। गोडसे ने 1948 में महात्मा गांधी की हत्या की थी।

उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं और हिंदू संगठनों ने विरोध जताया। आरोप लगाया गया कि कमल हासन चुनाव प्रचार के दौरान धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।

बाद में कमल हासन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने तमिल में ‘थीविरावादी’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसका अर्थ उग्रवादी या अतिवादी होता है। उनके मुताबिक, मीडिया में इसका अनुवाद आतंकवादी किया गया। उन्होंने अपने बयान को ऐतिहासिक संदर्भ में दिया गया बताया और इसे वापस लेने से इनकार किया।

3. ‘विश्वरूपम’ पर विवाद, घर तक गिरवी रखना पड़ा

 

2013 में आई फिल्म ‘विश्वरूपम’ कमल हासन के करियर की महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक थी। उन्होंने फिल्म में अभिनय करने के साथ इसका निर्देशन और निर्माण भी किया था। फिल्म की कहानी और कुछ दृश्यों को लेकर मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि फिल्म में मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद से जोड़कर दिखाया गया है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते 23 जनवरी 2013 को फिल्म की रिलीज पर दो सप्ताह की रोक लगा दी। कमल हासन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी, लेकिन फिल्म की रिलीज लगातार टलती रही।

इस दौरान कमल हासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि फिल्म बनाने के लिए उन्होंने अपना घर तक गिरवी रख दिया है। अगर फिल्म रिलीज नहीं हुई तो वह आर्थिक रूप से बर्बाद हो सकते हैं।

उन्होंने मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उन्हें देश छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ा था, वैसी ही परिस्थिति उनके सामने भी बन रही है। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष जगह पर बसने की बात कही।

आखिरकार मुस्लिम संगठनों और कमल हासन के बीच करीब छह घंटे चली बैठक में समझौता हुआ। कमल हासन ने फिल्म के सात विवादित दृश्यों के ऑडियो को म्यूट करने पर सहमति जताई। इसके बाद फिल्म को तमिलनाडु में रिलीज करने का रास्ता साफ हुआ।

स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी पर मस्क की टिप्पणी का दिया जवाब

अक्टूबर 2026 में कमल हासन एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में आए। इस बार मामला हॉलीवुड या भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क का था।

मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए पूछा था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?

इस पर राज्यसभा सांसद कमल हासन ने X पर जवाब दिया कि कोई भी अरबपति किसी देश की नीतियां तय नहीं कर सकता, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र है, किसी का उपनिवेश नहीं। देश के भविष्य का फैसला यहां के लोग करेंगे।

कमल ने यह भी कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट जैसी सेवाओं में प्रतिस्पर्धा का स्वागत होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता।

5. निजी जिंदगी भी रही चर्चा में

कमल हासन (Kamal Haasan) की निजी जिंदगी भी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में रही है। उनकी पहली शादी वाणी गणपति से हुई थी। बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री सारिका से शादी की। उनकी दो बेटियां श्रुति हासन और अक्षरा हासन हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।

सारिका से अलग होने के बाद अभिनेत्री गौतमी के साथ उनका रिश्ता भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। दोनों ने कई साल साथ बिताए, लेकिन 2016 में अलग होने की घोषणा कर दी।

कमल हासन ने अपनी निजी जिंदगी और रिश्तों को लेकर भी कई बार खुलकर बात की है। यही वजह है कि उनकी जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके फैसले और बयान भी लगातार सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने।

एक अभिनेता, कई पहचान

कमल हासन का सफर एक ऐसे कलाकार का सफर है, जिसने पारंपरिक अभिनय की सीमाओं से बाहर निकलकर लगातार नए प्रयोग किए। कभी तकनीक और मेकअप के जरिए किरदारों को नया रूप दिया, तो कभी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। उनकी फिल्मों और बयानों से सहमति-असहमति हो सकती है, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान और प्रयोगधर्मिता ने उन्हें अलग पहचान दी है।

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