CG Train Cancelled: छत्तीसगढ़ में 10 से 12 जून तक 8 ट्रेनें रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रेल (Train) यात्रियों के लिए एक बार फिर बड़ी और परेशान करने वाली खबर है। अगर आप अगले कुछ दिनों में ट्रेन से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले अपना ट्रेन (CG Train Cancelled) शेड्यूल जरूर चेक कर लें। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के नागपुर मंडल के तहत रसमड़ा स्टेशन पर मालगोदाम लाइन के निर्माण और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण रेलवे ने 10 जून से 12 जून तक कुल 8 मेमू (MEMU) और डेमू (DEMU) ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करने का फैसला किया है। इसके साथ ही कई पैसेंजर ट्रेनों को आंशिक रूप से शॉर्ट-टर्मिनेट भी किया जा रहा है।
रेलवे के इस फैसले से न केवल छत्तीसगढ़ के भीतर एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले आम लोग प्रभावित होंगे, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की ओर रुख करने वाले दैनिक यात्रियों (Daily Commuters) को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
CG Train Cancelled List: कौन-कौन सी ट्रेनें रहेंगी प्रभावित?
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित रूट की मेमू और डेमू ट्रेनें प्रभावित रहेंगी:
- रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू (MEMU)
- डोंगरगढ़-रायपुर मेमू (MEMU)
- डोंगरगढ़-गोंदिया मेमू (MEMU)
- गोंदिया-डोंगरगढ़ मेमू (MEMU)
- गोंदिया-इतवारी मेमू (MEMU)
- इतवारी-गोंदिया मेमू (MEMU)
- इतवारी-बालाघाट डेमू (DEMU)
- बालाघाट-इतवारी डेमू (DEMU)
इसके अलावा, ट्रेन संख्या 68705 रायपुर-डोंगरगढ़ पैसेंजर को 10 और 11 जून को दुर्ग स्टेशन पर ही समाप्त (Short-Terminate) कर दिया जाएगा। वहीं, वापसी में ट्रेन नंबर 68706 डोंगरगढ़-बिलासपुर पैसेंजर डोंगरगढ़ के बजाय दुर्ग स्टेशन से ही अपनी यात्रा शुरू करेगी।
15 घंटे का मेगाब्लॉक: क्यों लिया गया यह फैसला?
रेलवे प्रशासन के अनुसार, रसमड़ा स्टेशन पर मालगोदाम लाइन के विकास के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य 9 और 10 जून को किया जाएगा। इसके बाद, मुख्य नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्य 11 जून को सुबह 11:30 बजे से शुरू होकर 12 जून को दोपहर 02:30 बजे तक लगातार 15 घंटे चलेगा। इसी भारी-भरकम काम को पूरा करने के लिए रेलवे को ‘मेगाब्लॉक’ लेना पड़ा है, जिसके चलते इन गाड़ियों का पहिया थम जाएगा।
प्रदेश के यात्रियों को किस तरह की मुश्किलात से गुजरना पड़ेगा?
मेमू और डेमू ट्रेनें किसी भी राज्य की लाइफलाइन होती हैं। इनमें सफर करने वाला कोई अमीर उद्योगपति नहीं, बल्कि रोज कमाने-खाने वाला मजदूर, दफ्तर जाने वाला छोटा कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के छात्र और अपनी फसलों-सब्जियों को बाजार तक पहुंचाने वाला छोटा किसान होता है। इन ट्रेनों के बंद होने से आम जनता को कई स्तरों पर मुश्किलात का सामना करना पड़ेगा:
आर्थिक शोषण: ट्रेन का टिकट जहां महज 10 से 30 रुपये का होता है, वहीं ट्रेन रद्द होने के कारण यात्रियों को मजबूरन निजी बसों, टैक्सियों या ऑटो का सहारा लेना पड़ेगा। इससे उनका सफर 10 गुना तक महंगा हो जाएगा।
समय की बर्बादी और मानसिक तनाव: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, और डोंगरगढ़ जैसे प्रमुख शहरों के बीच रोजाना हजारों लोग अप-डाउन करते हैं। ट्रेनों के अचानक रद्द होने से दफ्तर और कॉलेज पहुंचने में देरी होगी, जिससे लोगों का रोजगार और पढ़ाई दोनों प्रभावित होंगे।
गर्मियों का मौसम और बसों में भीड़: जून के इस महीने में भीषण गर्मी और उमस के बीच बसों में क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण सफर करना किसी सजा से कम नहीं होगा। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह बेहद कष्टदायक साबित होने वाला है।
बड़ा सवाल: क्यों बार-बार छत्तीसगढ़ में ही पैदा हो रहे हैं ऐसे हालात?
छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के मन में अब यह गुस्सा और सवाल स्वाभाविक रूप से उठने लगा है कि देश में सबसे ज्यादा राजस्व (Revenue) देने वाले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन में ही सबसे ज्यादा ट्रेनें क्यों रद्द होती हैं? आए दिन ‘विकास कार्य’, ‘चौथी लाइन का काम’ या ‘नॉन-इंटरलॉकिंग’ का हवाला देकर आम लोगों की सवारी को रोक दिया जाता है।
इसके पीछे की मुख्य वजहें और विफलताएं कुछ इस प्रकार समझी जा सकती हैं:
कोयला और मालगाड़ियों को प्राथमिकता (Freight Over Passengers) : छत्तीसगढ़ खनिज प्रधान राज्य है। रेलवे के लिए यहां से कोयला, लोहा और अन्य कच्चे माल की ढुलाई सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने का जरिया है। जानकारों का मानना है कि कई बार रेलवे का पूरा ध्यान मालगाड़ियों के सुचारू संचालन पर होता है। जब भी ट्रैक पर दबाव बढ़ता है या कोई काम होता है, तो सबसे पहले पैसेंजर और लोकल ट्रेनों की बलि चढ़ा दी जाती है, क्योंकि मालगाड़ी रोकने से रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान होता है, जबकि पैसेंजर ट्रेन रोकने से सिर्फ आम जनता परेशान होती है।
पुरानी व्यवस्था और आधुनिकरण में कछुआ चाल : भारतीय रेलवे अपने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को आधुनिक बनाने का दावा तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। रसमड़ा जैसी जगहों पर मालगोदाम लाइनों का विस्तार बहुत पहले हो जाना चाहिए था। योजनाबद्ध तरीके से काम न होने के कारण बार-बार टुकड़ों में ब्लॉक लिया जाता है, जिससे साल के बारह महीने किसी न किसी रूट पर ट्रेनें कैंसिल ही रहती हैं।
एडवांस प्लानिंग और समन्वय की कमी : रेलवे जब भी कोई बड़ा मेगाब्लॉक लेता है, तो वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने में पूरी तरह नाकाम रहता है। अगर 8 ट्रेनें रद्द की जा रही हैं, तो रेलवे को राज्य परिवहन निगम के साथ मिलकर विशेष बसें चलानी चाहिए या बची हुई ट्रेनों में अतिरिक्त जनरल कोच जोड़ने चाहिए। लेकिन ऐसा कोई समन्वय देखने को नहीं मिलता। यात्रियों को सिर्फ ‘असुविधा के लिए खेद है’ का एक बोर्ड थमा दिया जाता है।
रेलवे की यात्रियों को सलाह: टोल फ्री नंबर 139 का करें इस्तेमाल
इस संकट के बीच रेलवे प्रशासन ने यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। रेलवे ने कहा है कि असुविधा से बचने के लिए यात्री घरों से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का लाइव स्टेटस और शेड्यूल अवश्य जांच लें। यात्रा से संबंधित किसी भी तरह की पूछताछ या सहायता के लिए रेलवे के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल किया जा सकता है। इसके अलावा, रेलवे ने इस अवधि के दौरान यात्रा के लिए वैकल्पिक साधनों (जैसे सड़क परिवहन) का उपयोग करने की भी सलाह दी है।
रेलवे का विकास और लाइनों का विस्तार देश के लिए जरूरी है, लेकिन यह विकास आम आदमी की कीमत पर नहीं होना चाहिए। रेलवे को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर का काम भी समय पर पूरा हो और गरीब यात्रियों को बार-बार अपनी जेब ढीली कर मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।

