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आम आदमी को बड़ी राहत: सरकार ने 39 जरूरी दवाओं की कीमतें तय कीं, ब्लड प्रेशर-डायबिटीज की दवाएं होंगी किफायती

दिल्ली। देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती ( Major relief ) और सुलभ बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 39 आवश्यक दवाओं (फॉर्म्युलेशन) की खुदरा कीमतें निर्धारित कर दी हैं। इस निर्णय के बाद इन दवाओं को निर्धारित अधिकतम कीमत से अधिक पर नहीं बेचा जा सकेगा, जिससे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।

एनपीपीए की नई सूची में उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, संक्रमण (इन्फेक्शन), कोलेस्ट्रॉल और विटामिन की कमी के इलाज में उपयोग होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इनमें एम्लोडिपिन (Amlodipine) + टेल्मिसार्टन (Telmisartan), मेटफॉर्मिन (Metformin) + विल्डाग्लिप्टिन (Vildagliptin), एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin), विटामिन D3 तथा विभिन्न एंटीबायोटिक दवाओं के संयोजन शामिल हैं।

मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा

सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आवश्यक दवाओं की कीमतों ( Major relief )  को नियंत्रित कर मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करना और सभी वर्गों तक सस्ती दवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

कंपनियों और मेडिकल स्टोर के लिए सख्त नियम

एनपीपीए ने दवा कंपनियों और विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इन दवाओं को निर्धारित खुदरा मूल्य (Retail Price) से अधिक कीमत पर नहीं बेच सकते। यदि कोई कंपनी या विक्रेता तय कीमत से ज्यादा राशि वसूलता है, तो उसे आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और संबंधित नियमों के तहत ब्याज सहित अतिरिक्त वसूली गई राशि सरकार के खाते में जमा करनी होगी।

इसके अलावा सभी मेडिकल स्टोर, दवा विक्रेताओं और वितरकों को अपनी दुकानों के प्रमुख स्थान पर नई कीमतों की सूची प्रदर्शित करनी होगी, ताकि ग्राहक आसानी से दवाओं ( Major relief ) की निर्धारित कीमत देख सकें। यदि कोई कंपनी इन दवाओं को नए ब्रांड या नए पैक में बाजार में उतारती है, तब भी उसे एनपीपीए द्वारा तय कीमतों का पालन करना अनिवार्य होगा।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से लाखों मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा, खासकर वे लोग जो लंबे समय से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग या कोलेस्ट्रॉल की नियमित दवाएं लेते हैं। इन बीमारियों की दवाएं अक्सर जीवनभर लेनी पड़ती हैं, इसलिए कीमतों पर नियंत्रण से इलाज का खर्च कम होगा। साथ ही दवा कंपनियों की मनमानी कीमतों पर भी रोक लगेगी और आवश्यक दवाएं उचित दर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

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