‘जन नेता’ रिव्यू: थलपति विजय की आखिरी फिल्म में एक्शन, इमोशन और राजनीति का दमदार तड़का

नई दिल्ली। थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नेता’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म सिर्फ एक एक्शन ड्रामा नहीं, बल्कि विजय के 30 साल लंबे फिल्मी सफर को एक भावुक विदाई भी देती है। सिनेमा छोड़ राजनीति में कदम रख चुके विजय के लिए यह फिल्म उनके प्रशंसकों के लिए खास मायने रखती है।
फिल्म की कहानी वेत्री (थलपति विजय) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जेल में सजा काट रहा है। एक घटना के बाद उसे एक बच्ची की जिम्मेदारी मिलती है, जिसे वह सेना में अधिकारी बनाना चाहता है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय अपराधी जॉन हिमलर (बॉबी देओल) की एंट्री होती है, जिसके बाद कहानी एक्शन, इमोशन और संघर्ष से भर जाती है।
निर्देशक एच. विनोद ने फिल्म में दमदार एक्शन और बड़े पैमाने की प्रस्तुति देने की कोशिश की है। फिल्म में विजय के पुराने किरदारों और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई संदर्भ भी शामिल किए गए हैं, जो उनके प्रशंसकों को खास पसंद आ सकते हैं।
अभिनय की बात करें तो थलपति विजय पूरी फिल्म में छाए रहते हैं। उनका एक्शन, स्क्रीन प्रेजेंस और इमोशनल अभिनय प्रभाव छोड़ता है। वहीं, बॉबी देओल ने खलनायक के रूप में दमदार प्रदर्शन किया है और विजय के साथ उनकी टक्कर फिल्म को और रोचक बनाती है।
ममिता बैजू ने भी अपने किरदार से प्रभावित किया है। विजय और उनके बीच के भावनात्मक दृश्य फिल्म की बड़ी ताकत बनकर सामने आते हैं। हालांकि पूजा हेगड़े के हिस्से में ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं आया है।
फिल्म का संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने दिया है, जिसका बैकग्राउंड स्कोर एक्शन और बड़े दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है।
हालांकि, फिल्म की लंबाई कुछ दर्शकों को ज्यादा महसूस हो सकती है और कुछ हिस्सों में कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है। इसके बावजूद, अगर आप थलपति विजय के प्रशंसक हैं और उनकी आखिरी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं, तो ‘जन नेता’ आपके लिए एक शानदार सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है।

