पुतिन के दौर में रूस ने ऐसे बढ़ाई तकनीकी ताकत, फाइटर जेट से AI और अंतरिक्ष तक बढ़ा दबदबा

रूस की पहचान लंबे समय से उसकी सैन्य ताकत और मिसाइल तकनीक के लिए रही है, लेकिन देश ने तकनीक के कई दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता विकसित की है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौर में लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस, मिसाइल, सैटेलाइट, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर तकनीक पर खास जोर दिया गया है। रूस की कई तकनीकें सैन्य क्षेत्र से जुड़ी हैं, जबकि कुछ का इस्तेमाल अंतरिक्ष और आधुनिक कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
S-400 और S-500 से मजबूत एयर डिफेंस
रूस के पास S-400 और S-500 जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इनका इस्तेमाल हवाई खतरों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए किया जाता है। दुश्मन के विमान या मिसाइल की पहचान करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता इन प्रणालियों को रूस की प्रमुख सैन्य तकनीकों में शामिल करती है।
रूस ने आधुनिक लड़ाकू विमान और तेज रफ्तार मिसाइल तकनीक पर भी काम किया है। Su-57 उसका आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा किनझाल और जिरकोन जैसी तेज गति वाली मिसाइलें भी उसकी सैन्य तकनीकी क्षमता का हिस्सा हैं।
परमाणु ऊर्जा और आधुनिक हथियार तकनीक
रूस ने परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल से जुड़ी कुछ अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों पर भी काम किया है। बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल और पोसीडॉन टॉरपीडो इसी तरह की परियोजनाओं में शामिल हैं। इन तकनीकों में लंबी दूरी तक संचालन के लिए परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की अवधारणा पर काम किया गया है।
AI, अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक पर जोर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए बड़े कंप्यूटर और डेटा सेंटर की जरूरत होती है, जिनके संचालन में भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है। रूस के पास परमाणु, जलविद्युत और अन्य ऊर्जा स्रोत हैं। देश अपनी ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल AI और आधुनिक कंप्यूटिंग के विकास में करने की कोशिश कर रहा है।
अंतरिक्ष तकनीक में रूस का अनुभव सोवियत संघ के समय से पुराना है। आज भी वह रॉकेट और सैटेलाइट तकनीक पर काम करता है। रूस का GLONASS सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम GPS की तरह स्थान और दिशा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करता है।
इसके अलावा रूस ने कंप्यूटर, इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल से जुड़ी तकनीकों पर भी काम किया है। इस तरह रूस की तकनीकी क्षमता केवल मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सैन्य तकनीक के साथ-साथ AI, ऊर्जा, अंतरिक्ष, सैटेलाइट और कंप्यूटर जैसे क्षेत्रों में भी देश अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।



